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राजा परीक्षित जन्म, शुकदेव आगमन की कथा सुन भावविभोर हुए श्रोता, गुप्ता परिवार में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में बड़ी संख्या में पहुंचे श्रोता।

चांपा। नगर के डोंगाघाट चौक साईं मंदिर के पास गुप्ता परिवार में शुरु हुई श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस कथा में आचार्य पंडित अरविंद शर्मा ने श्री शौनक ऋषि के प्रश्न से सूतजी के द्वारा कथा प्रारंभ, जिसमें भगवान के चौबीस अवतार का वर्णन, व्यास जी के द्वारा अठारह पुराणों का निर्माण,पांडव वंश में परीक्षित जी का जन्म, परीक्षित का कलियुग को चेतावनी, परीक्षित द्वारा शमिक ऋषि का अपमान, श्रृंगी ऋषि के द्वारा परीक्षित को सात दिन में मरने का श्राप, शुकदेव जी की जन्म कथा, शुकदेव जी का परीक्षित के समीप आगमन की कथा सुनाई गई। कथा का आयोजन यजमान शारदा गुप्ता, भवानी गुप्ता, देवी गुप्ता द्वारा उनके पिता स्व. विजय कुमार गुप्ता के वार्षिक श्राद्ध निमित्त कराया जा रहा है।
कथा वाचक आचार्य पंडित अरविंद शर्मा ने कहा कि, कलयुग के प्रभाव से राजा परीक्षित ने ऋषि श्रृंगी के गले में मरा हुआ सर्प डाल दिया था और ऋषि ने उन्हें श्राप दिया कि ठीक सातवें दिन सर्प के काटने से उनकी मृत्यु हो जाएगी। उसी श्राप के निवारण के लिए वेद व्यास द्वारा रचित भागवत कथा शुकदेव द्वारा सुनाई गई। जिसमें उनका उत्थान हो गया। राजा परीक्षित ने सात दिन भागवत सुनकर किस तरह अपना उद्धार कर लिया। उसी तरह प्रत्येक व्यक्ति को भागवत का महत्व समझना चाहिए। भागवत अमृत रूपी कलश है। जिसका रसपान करके आदमी अपने जीवन को कृतार्थ कर लेता है। इसलिए जहां भी भागवत होती है। ध्रुव चरित्र सृष्टि की रचना पर प्रकाश डालते हुए कहा कि, मनुष्य जीवन आदमी को बार-बार नहीं मिलता है इसलिए इस कलयुग में दया धर्म भगवान के स्मरण से ही सारी योनियों को पार करता है। मनुष्य जीवन का महत्व समझते हुए भगवान की भक्ति में अधिक से अधिक समय देना चाहिए। उन्होंने बताया कि, भगवान विष्णु ने पांचवा अवतार कपिल मुनि के रूप में लिया। 
कथा के दौरान सुनाए गए भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। दोपहर 2 बजे से देर शाम तक चलने वाली कथा में बड़ी संख्या में महिला-पुरूष कथा श्रवण करने पहुंचे।

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