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मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना यह लाइन क्या हम भूलते जा रहे

जांजगीर चाम्पा। बहुत ही प्यारा गीत जो बचपन से हम सभी ने गाया है सुना है पसंद किया है "सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा" उस गीत की यह लाइन "मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना" साथ ही एक लाइन सभी हम बोलते हैं हिंदू मुस्लिम सिख इसाई आपस में हम भाई-भाई फिर किस बात का झगड़ा किस बात का तनाव। भारत अनेकता में एकता का प्रतीक है पूरे विश्व में भारत सोने की चिड़िया कहलाती थी बस यही कारण अनेकता में एकता। यहां भिन्न-भिन्न जाति रंग रूप सब एक साथ रहते हैं कोई भी किसी भी प्रकार का मतभेद नहीं कोई बैर वाली बात नहीं सब एक साथ मिलजुल कर त्यौहार मनाते हैं और आपसी भाईचारा निभाते हैं। अनेकता में एकता का अर्थ है—
भिन्न-भिन्नता के बावजूद एकता।
भारत में भाषा, धर्म, जाति, संस्कृति, पहनावा और परंपराएँ अलग-अलग हैं, फिर भी हम सभी एक देश, एक संविधान और एक राष्ट्रीय भावना से जुड़े हुए हैं। यही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
संक्षेप में समझें:
अलग सोच, पर एक लक्ष्य
अलग पहचान, पर एक देश
विविधता, पर आपसी सम्मान फिर काहे का झगड़ा क्यों आज ऐसे माहौल बना रहे हैं कि आपस में हम टकरा रहे हैं क्यों धर्म के नाम पर हम ऐसा कदम उठा रहे जिससे अन्य को फर्क पड़ता है । हम क्या हैं किस जाति के हैं किस धर्म के हैं या एक अलग बात सबसे पहले हम इंसान हैं। हिंदुस्तानी है भारत के निवासी हैं उस भारत के जहां अनेकता में एकता की मिसाल दी जाती है जहां हर धर्म के सब एक धागे में पिरोये एक भाईचारे के रूप में रहते हैं सभी त्योहार मिलजुल कर बनाते हैं कोई किसी प्रकार का मतभेद नहीं रखते फिर क्यों ऐसा हो रहा है।  मैं ध्यान उस और आकर्षित करना चाहता हूं जहां कुछ विचार करने की आवश्यकता है । हम अपने धर्म के प्रति अडिग रहे यह सब को कहा जाता है और होना भी चाहिए मगर समस्त धर्म का सम्मान करना अत्यंत आवश्यक है यह हर धर्म में सिखाया जाता है।  एक विचार करने योग्य बात है क्रिसमस के दिन जो कुछ हादसे हुए  और कुछ बातें सामने आई जो सबके समक्ष है साल में एक दिन का पर्व मगर क्यों उनसे इतनी उपेक्षा की जा रही है क्यों तोड़फोड़ किए गए क्या वे भारत में रहने वाले नहीं क्या अभी हिंदुस्तानी नहीं क्या वे अन्य पर्व में शामिल नहीं होते ठीक है कुछ बातों को लेकर धर्मांतरण को लेकर आक्रोश है लेकिन गलती किसकी जो अपने धर्म को बदलकर जा रहा उसे समझाने की जरूरत है।  क्यों कुछ भी ऐसा होता है हमेशा धर्म को लेकर विवाद होता है । पूरे विश्व में भारत ही एक ऐसा देश है जहां मिसाल दी जाती है की हर धर्म के एक भाईचारा के रूप में रहते हैं तो उसके बाद ऐसा क्यों आज किसी एक धर्म को लेकर विवाद हुआ कल दूसरे धर्म को लेकर विवाद होगा इस पर विचार करने की आवश्यकता है।  धर्म को लेकर विवाद होना ही नहीं चाहिए हमें दूसरों की भावनाओं की भी कद्र करनी चाहिए जरा सोचिए दिसंबर का यह सप्ताह सिखों के लिए कितना महत्वपूर्ण है गुरु गोविंद सिंह जी के पूरा परिवार कैसे न्योछावर हुए यही सप्ताह है जो याद करते आंखें भीग जाती है और इसी दिवस पर ऐसा त्यौहार जो साल में एक बार आता है जो उनकी खुशियों का होता है पर कभी हम एतराज जाहिर नहीं करते ना हम उनकी खुशियों को ना मानने के लिए  नही कहते हैं हम उनके भी सम्मान करते हैं क्योंकि यह सभी मानव को अधिकार है उसे समझने का की कहां क्या किया जाए और उन्हें भी समझना होगा । हम सबको समझना होगा हम अपने धर्म के प्रति  अडिग सभी धर्म का सम्मान करें और यह मत भूले की हम भारत देश के निवासी हैं और भारत अनेकता में एकता की मिसाल है उसे हम सब मिलकर कायम रखें।

डाॅ. जतिन्दरपाल सिंह 
प्रदेश अध्यक्ष छत्तीसगढ़ 
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो

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