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निजी मोबाइल में दबावपूर्वक एप डाउनलोड कराना शिक्षकों की निजता का हनन

इमरान खोखर ब्यूरो चीफ मुंगेली 
मुंगेली । शासकीय स्कूलों में ई-अटेंडेंस के नाम पर शिक्षकों के निजी मोबाइल फोन में दबावपूर्वक VSK ऐप डाउनलोड कराना अब विवाद का विषय बनता जा रहा है। शालेय शिक्षक संघ ने इसे संविधान प्रदत्त निजता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए शिक्षा विभाग की मंशा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। संगठन का कहना है कि निजी मोबाइल में एप डाउनलोड कराने से डाटा लीक, साइबर क्राइम, डीप फेक और AI के दुरुपयोग जैसी गंभीर आशंकाएं उत्पन्न हो रही हैं, जिसकी जिम्मेदारी तय नहीं की जा रही है।

नेटवर्क और सर्वर की समस्या, फिर भी मोबाइल आधारित ई-अटेंडेंस

शालेय शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष दीपक वेंताल ने कहा कि दूरस्थ ग्रामीण अंचलों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक नेटवर्क और सर्वर डाउन की समस्या आम है। ऐसे हालात में मोबाइल नेटवर्क आधारित ई-अटेंडेंस न सिर्फ अव्यवहारिक है बल्कि शिक्षकों पर अनावश्यक मानसिक दबाव भी बढ़ा रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब विभाग के पास ई-अटेंडेंस के लिए स्वयं का कोई ठोस मैकेनिज्म नहीं है, तो इसके लिए शिक्षकों के निजी मोबाइल का उपयोग करना कहां तक उचित है।

निजी मोबाइल, निजी डाटा… फिर जवाबदेही किसकी?

शिक्षक संघ का कहना है कि किसी भी एप को डाउनलोड करते समय कैमरा, लोकेशन, डाटा और स्टोरेज की अनुमति देनी पड़ती है। ऐसे में शिक्षकों के मोबाइल में मौजूद परिवारिक तस्वीरें, बैंक संबंधी जानकारी और निजी दस्तावेज असुरक्षित हो जाते हैं। दीपक वेंताल ने कहा कि AI और डीप फेक के इस दौर में निजी मोबाइल में दबावपूर्वक एप डाउनलोड कराना शिक्षकों और उनके परिवार की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर ई-अटेंडेंस के पायलेट प्रोजेक्ट को निरस्त करने की मांग की है।

क्या विभाग को अपने अधिकारियों पर भरोसा नहीं?

शालेय शिक्षक संघ के जिला सचिव नेमीचंद भास्कर ने सवाल उठाया कि क्या शिक्षा विभाग को अपने ही तंत्र पर भरोसा नहीं रहा।
उन्होंने कहा कि विभाग में पहले से ही CAC, संकुल प्राचार्य, संस्थाप्रमुख, BRCC, ABEO और BEO जैसे जिम्मेदार अधिकारी पदस्थ हैं। ऐसे में एप के माध्यम से निगरानी की आवश्यकता यह दर्शाती है कि विभाग स्वयं अपने अधिकारियों की भूमिका को कमजोर मान रहा है।

पढ़ाने की बजाय गैर-शैक्षणिक कार्यों का बोझ

संघ पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि एक ओर विभाग शिक्षा गुणवत्ता की बात करता है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों पर गैर-शैक्षणिक, ऑनलाइन और प्रशासनिक कार्यों की भरमार थोप दी जा रही है। ब्लॉक अध्यक्ष दुर्गेश देवांगन, गुनाराम निर्मलकर और विवेक गोविंद ने कहा कि शिक्षकों को पढ़ाने का समय देने के बजाय ऐसे प्रयोग किए जा रहे हैं, जिनका शिक्षा से सीधा संबंध नहीं है।

संविधान प्रदत्त निजता के अधिकार का उल्लंघन

शिक्षक संघ ने स्पष्ट कहा कि मोबाइल शिक्षक की निजी संपत्ति है और उस पर किसी भी प्रकार का दबाव बनाकर एप डाउनलोड कराना निजता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।
संगठन ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि VSK ऐप आधारित ई-अटेंडेंस के इस पायलेट प्रोजेक्ट पर तत्काल रोक लगाई जाए और शिक्षकों को अनावश्यक प्रयोगों से राहत दी जाए।

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