जिला

कैंसर-पीड़ित पत्नी को बाइक पर लिटाकर भटक रहा किसान

कवर्धा

छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के नगवाही गांव के किसान समलू बताते हैं कि कैंसर पीड़ित पत्नी को कवर्धा, रायपुर, दुर्ग और मुंबई तक इलाज के लिए ले गया, लेकिन पैसों की वजह से इलाज अधूरा है। इलाज में पहले जेवर गए, फिर बैल और 5-7 लाख का कर्जदार हो गया। अब सरकार से मदद की उम्मीद है, ताकि पत्नी की जान बच सके।

किसान समलू बताते हैं कि अस्पताल ले जाने के लिए न एम्बुलेंस आती है, ना कोई सरकारी गाड़ी। डॉक्टर्स ने कह दिया है कि इलाज महंगा है, लंबा चलेगा। अब जब पैसे ही नहीं रहे, तो इलाज अधूरा है। पत्नी की पीड़ा देखकर वह सहम उठते हैं।

दरअसल, नगवाही गांव के रहने वाले समलू सिंह मरकाम पेशे से किसान हैं। समलू सिंह की पत्नी कैंसर पीड़ित है। पत्नी को पहले कवर्धा जिला अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन वहां से बड़े हॉस्पिटल ले जाने के लिए कहा गया, फिर पत्नी को रायपुर, दुर्ग, बैतूल, गोंदिया और मुंबई ले गया, जहां 5-7 लाख रुपए खर्च हो गए।

समलू सिंह मरकाम बताते हैं कि पत्नी की इलाज में खेत, जेवर और बैल तक बेच दिए। अब कुछ बचा नहीं है। रिश्तेदारों से उधार मांगने पर वहां से भी पैसे नहीं मिल रहे हैं। रिश्तेदार पहले से कर्ज दे चुके हैं, जिसे वापस लौटा नहीं पाया। अब वह भी पैसे देने से इनकार कर देते हैं।

समलू के मुताबिक कैंसर से पत्नी की हालत गंभीर हो गई है। हालत इतनी बिगड़ चुकी है कि अब वह चल-फिर नहीं सकती। रायपुर में ऑपरेशन हुआ था, लेकिन बीमारी दोबारा फैल गई। नसों पर असर होने से पैर काम नहीं कर रहे हैं। इसलिए वह बाइक पर लादकर ले जाते हैं।

समलू सिंह के मुताबिक आर्थिक स्थिति खराब होने पर गृहमंत्री विजय शर्मा से मदद मांगी थी। इस दौरान विजय शर्मा ने 10 हजार रुपए की सहायता दी थी, जिससे तत्काल इलाज शुरू हुआ। अब फिर स्थिति गंभीर है और इलाज का खर्च लाखों में पहुंच गया है। सरकार से मदद की अपील की है।

Leave Your Comment

Click to reload image