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आज़ादी के 78 साल बाद भी नहीं बढ़ी SC-ST की आय सीमा, संगठन ने जताया विरोध

इमरान खोखर ब्यूरो चीफ मुंगेली(बिहान छत्तीसगढ़) 

देश आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है, और वर्ष 2047 तक विकसित भारत का संकल्प लिया जा रहा है। परंतु आज भी अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग की स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी हालिया विज्ञापन ने इन वर्गों में असंतोष की लहर पैदा कर दी है। मंत्रालय ने सत्र 2025-26 के लिए जारी अधिसूचना में कहा है

कि जिन विद्यार्थियों के माता-पिता की वार्षिक आय ₹2 लाख 50 हजार से अधिक नहीं है, केवल वही छात्रवृत्ति के पात्र होंगे। वहीं दूसरी ओर EWS वर्ग के लिए यह आय सीमा ₹8 लाख रुपये निर्धारित की गई है।गवर्नमेंट एम्प्लॉइज वेलफेयर एसोसिएशन छत्तीसगढ़ ने इसे असमानता करार देते हुए कड़ी आपत्ति जताई है। प्रदेश अध्यक्ष कृष्णकुमार नवरंग एवं उपाध्यक्ष भोलाराम मरकाम ने कहा कि देश की 22% जनसंख्या आज भी आय सीमा के कारण सरकारी योजनाओं से वंचित है। आज़ादी के 78 साल बाद भी इस वर्ग की आय सीमा जस की तस बनी हुई है,

जिससे यह वर्ग शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास में पीछे रह गया है। संगठन की महिला प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष संगीता पाटले, सचिव राधेश्याम टंडन और सदस्य एवन बंजारे ने कहा कि सरकार एक ओर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 8 लाख की सीमा के तहत योजनाओं का लाभ दे रही है,

वहीं अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लिए केवल 2.5 लाख की सीमा रखी गई है, जो वर्तमान सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों में न्यायसंगत नहीं है। संगठन के प्रदेश सचिव नरेंद्र जांगड़े, महामंत्री सनत बंजारे, बसंत बंजारे, दिनेश जोशी, एम.के. राणा, दिनेश बर्वे, बसंत जांगड़े, चेतन चतुर्वेदी, नरसिंह मंडावी एवं परस अंचल ने भारत सरकार से मांग की है कि SC, ST और OBC वर्गों की आय सीमा बढ़ाकर 15 लाख रुपये की जाए। उन्होंने प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों, विधायकों और सांसदों से अपील की है कि वे इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठाएँ, ताकि सामाजिक न्याय और समान अवसर का सपना साकार किया जा सके। संगठन का कहना है कि यदि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है, तो सामाजिक न्याय और समान अधिकार सुनिश्चित करना अनिवार्य है। “आर्थिक समानता के बिना विकसित भारत का सपना अधूरा रहेगा।”

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