तोमर बंधु से कम नहीं बलौदाबाजार जिले के सूदखोरी के बढ़ते चर्चित मामले जिले में पहले भी सूदखोरी के चलते हुई है आत्महत्याएं व कोशिशें बलौदाबाजार पुलिस के सामने एक और मामला आया सूदखोरी का जिले में सूदखोरी के बढ़ते मायाजाल को तोड़ने में नाकाम दिख रही बलौदाबाजार पुलिस
गोविंद राम ब्यूरो रिपोर्ट
बलौदाबाजार l जिले में बेतरतीब बढ़ रहा सूदखोरी का मायाजाल जिसके चलते परेशान और पीड़ित लोगों ने या तो आत्महत्या का प्रयास किया या शहर छोड़ भाग गये ऐसे में भी सूदखोरो ने उन्हें नहीं बख्शा कुछ खोजबीन कर उनके खेत, घर, दुकान, वाहन आदि अपने कब्जे में कर लिए जाने की कई मौखिक अथवा गोपनीय सूत्रों से सूचनाएं प्राप्त होती रहती है l जिले में इस धंधे में पहले महाजनी ब्याज के नाम पर विधिवत लायसेंस लिया जाता है फिर कुछ सूदखोर इसका जमकर फायदा उठाते है l एक लायसेंस की आड़ में बेहिसाब सूदखोरी में कही पति-पत्नी की जोड़ी तो कही चाचा-भतीजी की जोड़ी तो कही बाप-बेटा की तो कही मां-बेटे की जोड़ी या दोस्त यार वगैरह-वगैरह की जोड़ी तैयार होती है जो सिर्फ एक महाजनी लाइसेंस की आड़ में कितनी अन गिनत दुकानें तैयार होकर पीड़ित मजबूर व्यक्ति का फायदा उठा कर उनसे दुनिया भर की नियम बता कर कोरा स्टाम्प, कोरे चेक में हस्ताक्षर करवा कर बकायदा बैंकों की तरह प्रोसेसिंग फीस काटकर राशि दी जाती हैं l ऐसे मामले जिले में लगातार बढ़ रहे है सूदखोरी का काला कारोबार बेकाबू होता जा रहा है। सूदखोरों के चंगुल में फंसे लोग न तो आसानी से निकल पाते हैं और न ही पुलिस-प्रशासन से उन्हें न्याय मिलता है। सवाल यह है कि आखिर क्यों पुलिस इस संगठित वसूली गैंग पर कार्रवाई करने से बचती दिख रही है? या कहीं न कहीं सूदखोरों के ऊपर कार्यवाही ना किए जाने का कोई राजनीतिक दबाव पुलिस पर है?
सूदखोर 5 से 10 प्रतिशत साप्ताहिक ब्याज की दर से रकम देकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। पीड़ित मूलधन से कई गुना रकम चुका देने के बाद भी छुटकारा नहीं पा पाते। पुलिस के पास जाने पर इसे अक्सर “आपसी लेन-देन” बताकर टाल दिया जाता है, जबकि अगर सूदखोर शिकायत करें तो तुरंत कार्रवाई होती है। यही दोहरे रवैये पर अब सवाल उठने लगे हैं।
अभी हाल ही में प्रार्थी पुरानी बस्ती बलौदाबाजार निवासी हेमंत कुमार कन्नौजे ने बताया कि गाड़ी की किस्त चुकाने के लिए उन्होंने सूदखोरों से रकम उधार ली थी। शुरुआत में 15 दिन और महीने के हिसाब से ब्याज वसूला गया, लेकिन बाद में यह दर सप्ताह में 10 प्रतिशत तक पहुंच गया।
उन्होंने 50 हजार रुपये का कर्ज ब्याज सहित चुका दिया था। इसके बावजूद मार्च 2024 में उन्हें 1 लाख रुपये और लेना पड़ा। इन बीते साल भर में पीड़ित पक्ष नगद एवं upi पेमेंट के माध्यम से लाखों रु लौटा चुका इसके बाद भी लगातार दबाव और वसूली का सिलसिला जारी है। पीड़ित का आरोप है कि हेमलाल सिन्हा और उनकी पत्नी पिंकी सिन्हा उनसे गाली-गलौच कर रहे हैं, कोरे चेक और कोरे स्टाम्प जबरन ले लिए गए हैं और गाड़ी खींचने की धमकी दी जा रही है। डेढ़ साल से बच्चों की स्कूल फीस तक नहीं चुकाई जा सकी है। परिवार और दोस्तों तक को गुंडों के जरिए धमकाया जाने आदि का आरोप पीड़ितों द्वारा लगाया जा रहा है।
सबसे गंभीर बात यह है कि इस दंपति ने अपनी समस्या लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक शिकायत की, लेकिन वहां भी उन्हें निराशा हाथ लगी। एसपी कार्यालय ने इस प्रकरण को “लेन-देन का मामला” कहकर चलता कर दिया। क्या पुलिस किसी बड़ी घटना घटित होने का इंतजार कर रही है? अब बड़ा सवाल यह है कि जब मूलधन से कई गुना रकम वसूल की जा चुकी है और धमकी-उत्पीड़न का सिलसिला जारी है, तब भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या प्रशासन सूदखोरों के दबाव में है? या फिर वसूली के इस अवैध कारोबार से पुलिस अपना पल्ला झाड़ रही है?
पीड़ित परिवार दर-दर की ठोकरें खा रहा है और न्याय के लिए भटक रहा है। लेकिन जब तक ऐसे काले कारोबार पर सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक न जाने कितने और परिवार सूदखोरों के जाल में फंसकर बर्बाद होते रहेंगे। समाचार लिखे जाने तक पिंकी सिंहा व हेमलाल सिंहा से उनका अभिमत लिये जाने हेतु प्रयास किया गया किन्तु फिलहाल उनसे संपर्क नहीं हो पाया है l शेष खबर उचित तथ्यों के साथ आगामी समाचार में प्रकाशित किए जाने का प्रयास किया जाएगा l