जिला

अज्ञात वाहन की टक्कर से बच्ची कोमा में, पिता की हड्डी टूटी, गरीब परिवार न्याय की गुहार में

 गोविंदराम जिला ब्यूरो

बलौदाबाजार


जिंदगी कब करवट बदल ले, कोई नहीं जानता। 7 अगस्त 2025 का दिन ग्राम नरधा थाना गिधौरी निवासी छबिलाल और उसके परिवार के लिए किसी दुःस्वप्न से कम नहीं रहा। सुबह करीब 11:40 से 11:57 के बीच छबिलाल अपनी पत्नी और दो मासूम बच्चों के साथ बाइक से रोहासी मार्ग से गुजर रहा था। इसी दौरान पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि पूरा परिवार सड़क पर गिर पड़ा, छबिलाल की कमर की हड्डी टूट गई और उसकी छोटी बेटी गंभीर चोट लगने के बाद कोमा में चली गई। दुर्घटना के तुरंत बाद वहां से गुजर रहे नरेंद्र बघेल (निवासी कोड़ापार) ने मानवता दिखाते हुए घायलों को उठाया

और तुरंत मदद की व्यवस्था की। पहले घायल मनीष को बोलेरो गाड़ी से कसडोल के आद्या हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर देखते हुए बलौदाबाजार के चंदा देवी हॉस्पिटल रेफर कर दिया। गौर करने वाली बात यह है कि दुर्घटना करने वाला व्यक्ति घटना स्थल पर मौजूद था और इलाज के लिए मदद भी कर रहा था, लेकिन जब पीड़ित पक्ष ने उसका नाम, पता और गाड़ी नंबर पूछना चाहा तो उसने स्पष्ट रूप से देने से मना कर दिया। और हालात की गंभीरता को देखकर वहाँ से  चुपचाप फरार हो गया। पीड़ित परिवार ने 10 अगस्त 2025 को पलारी थाने में अज्ञात वाहन चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। परिवार का कहना है कि उनके पास घटना के समय की पूरी बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है,

जिसमें घटना के सूचना कर्ता से बातचीत तथा आरोपी द्वारा गाड़ी का नंबर और परिचय छुपाने की बात साफ सुनाई देती है। यह परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है, इलाज के लिए पैसे तक नहीं हैं। मासूम बेटी का जीवन खतरे में है, पिता बिस्तर पर पड़े हैं और मां अपने बच्चों के साथ अस्पताल के चक्कर काट रही है। आंसुओं से भरी आंखों से छबिलाल का परिवार कहता है – हम पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, हमारा बच्चा जिंदगी और मौत से लड़ रहा है, और जिसने ये सब किया वह खुलेआम घूम रहा है। हमें न्याय चाहिए,

ताकि हमारी मासूम बेटी की चीखें बेकार न जाएं। गांव के लोग भी इस घटना से स्तब्ध हैं और पुलिस प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि आरोपी को जल्द से जल्द पकड़कर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि ऐसे लापरवाह वाहन चालकों के हौसले पस्त हों और सड़कें सुरक्षित बनें।

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