सावन मनभावन ! सखी री सावन मन भायो
चांपा
स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ,चांपा में बालिका शिक्षा के अंतर्गत दिनांक 02 अगस्त 2025 को ' सखी री सावन भन भायो ' कार्यक्रम एक अद्भुत और उत्साहवर्धन कार्यक्रम आयोजित हुआ , जिसमें बालिका शिक्षा के महत्व और माताओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया ।
बालिका शिक्षा के महत्व पर श्रीमति पाण्डेय ने प्रकाश डाला ।
आयोजित समारोह में मुख्य अतिथि श्रीमति वंदना पाण्डेय ( अध्यक्ष महिला ब्राह्मण महिला समिति ) , श्रीमती अन्नपूर्ण शुक्ला शा मा शाला खपरीडीह प्रधान पाठक, श्रीमती कल्पना पटनायक शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय महुदा ( च ) की शिक्षिका, विद्यालय प्रबंधन समिति के सदस्य कमललाल देवांगन जी के आतिथ्य में संपन्न हुआ ।
शिक्षित बेटियां न केवल अपने परिवार का नाम रौशन करती हैं बल्कि समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती है - वंदना पाण्डेय ।
श्रीमति वंदना पाण्डेय ने कहा कि सावन माह का पवित्र महिना भगवान शिव की पूजा और आराधना के लिए विशेष महत्व रखता हैं । उन्होंने बालिका शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह न केवल समाज के विकास के लिए हैं बल्कि यह हमारे देश के भविष्य को भी आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं । वन्दना भाभीजी ने कहा कि बालिका शिक्षा के बिना समाज का विकास अधूरा हैं । उन्होंने कहा कि बेटियां न केवल अपने परिवार का नाम रौशन करती हैं बल्कि समाज और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं । श्रीमति वंदना जितेंद्र पाण्डेय ग्रामीण परिवेश मुड़पार ( अफरीद ) की रहने वाली हैं । लगभग एक दशक पूर्व तहसील रोड पर मात्र 2500 रुपए की लागत पर वंदना बुटिक की स्थापना की । श्रीमति कुसुम-कृष्ण पाण्डेय ने दो बेटे और तीन बेटियों में सबसे छोटी बहु वंदना के लिए गांव में ही छोटी-सी श्रृंगार सामग्री की दुकान खोली थी। मां की मन्नत थी कि यह व्यापार फले-फूले । वंदना ने मात्र 2500 रुपए की लागत से चांपा शहर व्यवसाय स्थापित की ओर दो बेटे के जन्म के बाद परिवार के लिए खुशियों की सौगात लेकर आई तथा यह आज़ बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान में तब्दील हो गई हैं । वंदना आज बुटिक व्यवसाय के साथ सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थाओं में अग्रणी रहती हैं । वंदना पाण्डेय कहती हैं कि हर मुश्किल समय में पाण्डेय परिवार ने मेरा साथ दिया। मेरी सासु मां दुर्गा की अवतार हैं, उन्ही की प्रोत्साहन से इस मुकाम तक पहुंच पाई हूं। मेरे पति हर कदम पर मेरे साथी रहे हैं, मेरी कामयाबी का श्रेय भी उन्हीं को जाता हैं ।
पाश्चात्य संस्कृति के प्रभावों से बालिकाओं को बचाना चाहिए - श्रीमति शुक्ला और पटनायक ।
श्रीमति अन्नपूर्णा शुक्ला ने अभिभावक के रुप में माताओं की अहम भूमिका पर चर्चा की और वर्तमान समय में पाश्चात्य संस्कृति के प्रभावों से बचने के संदर्भ में जानकारी दी । वही श्रीमति आर पटनायक ने सरस्वती शिशु मंदिर में पढ़ने वाले भैया और बहनों के संस्कार शिक्षा पर चर्चा की और समाज में शिशु मंदिर की महत्ता के बारे में जानकारी दी ।
विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन ।
कार्यक्रम में विद्यालय के भैया -बहनों और पालक माताओं के लिए विविध प्रकार की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जैसे कि झुला,कुर्सी दौड़ , बाती बनाओं आदि-आदि शामिल हैं ।
कार्यक्रम का आरंभ ,उद्बोधन और संचालन । मातृ भारती का गठन ।
कार्यक्रम का आरंभ सम्मानीय अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया । इस कार्यक्रम में मातृ भारती का गठन किया गया। बालिका शिक्षा प्रमुख श्रीमती ललिता तिवारी और मीनी देवांगन के मार्गदर्शन में बालिका शिक्षा के 10 परिषदों की जानकारी एवं बालिका शिक्षा के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला गया । जिला शिशु वाटिका प्रमुख श्रीमती उषा देवांगन के द्वारा स्वर्ण प्राशन के महत्व, मोबाईल का उपयोग भोजन के समय न करने हेतु माताओं से आग्रह किया गया गृहकार्य , पठन-पाठन संबंधी चर्चा माताओं से की गई । प्रधानाचार्य कृष्ण कुमार पाण्डेय जी द्वारा अभिभावकों अभिभावक माताओं को भैया और बहनों के सर्वांगीण विकास के संदर्भ में विद्यालय में होने वाले विविध कार्यक्रमों को अवगत कराया गया विद्यालय के प्राचार्य अश्विनी कुमार कश्यप द्वारा भैया व बहनों के पालन-पोषण में मां की अहम भूमिका होती हैं मां एक सृजनकर्ता के रूप में होती हैं बालक-बालिकाओं को एक योग्य नागरिक बनाने में अहम् भूमिका निभाती हैं , इस संदर्भ में जानकारी दी गई । इस कार्यक्रम में मातृ भारती का गठन भी किया गया । कार्यक्रम का सफल संचालन कन्या भारती अध्यक्ष बहिन तृप्ति यादव ने की ।
कार्यक्रम में शामिल सहभागी ।
उक्त कार्यक्रम में बालिका शिक्षा प्रमुख श्रीमती ललिता तिवारी ,श्रीमती मीनी देवांगन के मार्गदर्शन व श्रीमती उषा देवांगन, श्रीमती गीता शर्मा, श्रीमती वंदना सोनी, श्रीमती रजनी पाण्डेय, श्रीमती केश्वरी नामदेव, श्रीमती खुशबू कैवर्त, श्रीमती जया कंसारी, श्रीमती रीना द्विवेदी, श्रीमती निशु राठौर, श्रीमती कल्पना यादव, श्रीमती दीपक साहू,कु.पायल देवांगन,कु.मल्लीका राठौर, श्रीमती पुष्पा राठौर,कु.रोशनी कंवर ,श्रीमती अनुसुइया यादव, श्रीमती पार्वती यादव सहित अन्यान्य महिलाएं शामिल थी ।