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राजस्व मंडल से अर्जी खारिज फिर भी बिक गई कोटवारी जमीन तहसीलदार पुसौर ने दिसंबर 2024 में किया नामांतरण, सेवा भूमि होती है अहस्तांतरणीय

रायगढ़

कोटवारी भूमि की खरीदी-बिक्री होती ही नहीं है। सरकार ने इस तरह की भूमि को कोटवारों के जीवन-यापन के लिए आवंटित किया है। राजस्व अभिलेखों में इसे अहस्तांतरणीय दर्ज करना है। पुसौर के दर्रामुड़ा में कोटवारी जमीन को रायगढ़ निवासी व्यक्ति ने रजिस्ट्री भी करवा ली और नामांतरण भी करवा लिया। रायगढ़ जिले में जो हो रहा है, वह चमत्कार है। जमीनों के इश्तिहार बिना खसरा नंबरों के प्रकाशित हो रहे हैं ताकि लोगों को पता ही न चल सके कि किस भूमि का आदेश हो रहा है। धनाढ्य लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए अफसर कोटवारी जमीनों की भी रजिस्ट्री करवा रहे हैं। कलेक्टर, कमिश्नर और राजस्व मंडल से आवेदन खारिज होने के बावजूद ऐसा किया जा रहा है।

ऐसा ही एक मामला पुसौर तहसील के दर्रामुड़ा का है। यहां कैलाश चौहान पिता गैठू के नाम पर खसरा नंबर 375/1 रकबा 0.405 हे. आवंटित भूमि दर्ज थी। कोटवार को सेवा भूमि के रूप में जमीन दी गई थी जिसका राजस्व अभिलेखों में अपडेशन नहीं किया गया। सबसे पहले कैलाश ने कलेक्टर रायगढ़ के समक्ष इस भूमि के विक्रय की अनुमति मांगी, लेकिन कलेक्टर ने तर्क दिया कि इस भूमि का पट्टा जीविकोपार्जन के लिए दिया गया था। कलेक्टर के आदेश के विरुद्ध अपर कलेक्टर कैम्प में पुनरीक्षण प्रस्तुत किया गया। वहां भी पुनरीक्षण आवेदन को खारिज किया गया। इसके बाद राजस्व मंडल के समक्ष पुनरीक्षण आवेदन प्रस्तुत किया गया।

आवेदक ने कलेक्टर के आदेश को विधि विपरीत बताते हुए विक्रय की अनुमति मांगी, लेकिन राजस्व मंडल ने भी शासकीय पट्टे की भूमि को बेचने के लिए पुनरीक्षण आवेदन को खारिज कर दिया। लेकिन इसका असर पुसौर तहसीलदार पर नहीं पड़ा। राजस्व मंडल का आदेश 16 मार्च 2023 को आया, लेकिन एक साल बाद जमीन की रजिस्ट्री करवा ली गई। क्रेता रायगढ़ निवासी उमा अग्रवाल पति सतीश अग्रवाल हैं। 13 मार्च 2024 को नामांतरण के लिए पुसौर तहसीलदार ने नोटिस जारी किया। नवंबर 2024 में जमीन उमा अग्रवाल के नाम कर दी गई। 

कोटवारों के लिए नहीं बचेगी जमीन
कोटवारी जमीनों को वापस शासन के खाते में दर्ज करने का आदेश छग शासन राजस्व विभाग दे चुका है। इसका पालन करने के बजाय राजस्व अधिकारी इनको बिकवाने में मदद कर रहे हैं। कलेक्टर, कमिश्नर से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद रजिस्ट्री व नामांतरण हो जाना, बेहद गंभीर है। रायगढ़ जिले में कोटवारी जमीनों की खरीदी-बिक्री करने वालों के विरुद्ध राजस्व मंडल पहले एफआईआर के आदेश दे चुका है जिसे दबा दिया गया है। ऐसा चलता रहा तो किसी भी गांव में कोटवारी सेवा भूमि नहीं बचेगी। रायगढ़ के आसपास की जमीनें तो पहले ही कब्जाई जा चुकी हैं।

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