ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग में कार्यभार का असंतुलन, विकास कार्य ठप
गोविंद राम जिला ब्यूरो बलौदा बाजार
एक पद का बोझ ही भारी, तीन पदों की जिम्मेदारी कैसे निभाएं
बलौदाबाजार:-
ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग, जो कि गांवों के आधारभूत ढांचे के निर्माण में रीढ़ की हड्डी मानी जाती है, आज खुद प्रशासनिक ढांचे की अनदेखी का शिकार हो चुकी है। जिस कारण जिला बलौदाबाजार में इन दिनों ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। विभाग के एक ही अधिकारी पर तीन-तीन जिम्मेदारियाँ डाल देने से न केवल प्रशासनिक संतुलन बिगड़ा है, बल्कि जिले के सैकड़ों पंचायतों के निर्माण कार्य भी अधर में लटके हुए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्री योगेश खांडे वर्तमान में कार्यपालन अभियंता (E.E.) जिला ग्रामीण यांत्रिकी सेवा बलौदाबाजार, एस.डी.ओ बलौदाबाजार जनपद , और एस.डी.ओ कसडोल जनपद सहित इन तीनों पदों का दायित्व एक साथ निभा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि कसडोल जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर स्थित है, और वहां भी प्रतिदिन तकनीकी निरीक्षण एवं स्वीकृति से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य होते हैं। एक ही व्यक्ति के द्वारा तीनों स्थानों की जिम्मेदारी एक साथ निभा पाना न तो प्रशासनिक रूप से उचित है, न ही व्यावहारिक रूप से संभव। कार्यपालन अभियंता के रूप में अधिकारी को पूरे जिलेभर के निर्माण कार्यों की निगरानी, तकनीकी स्वीकृति, निरीक्षण और समन्वय करना होता है, जो अपने आप में पूर्णकालिक दायित्व है और इसी में अधिकांश समय व्यतीत हो जाता है।
कार्य का दबाव, विकास की धीमी रफ्तार
बलौदाबाजार जिले की ग्राम पंचायतों में प्रधानमंत्री आवास योजना, मनरेगा, शासकीय भवन अहाता निर्माण, नाली, पुल-पुलिया, सीसी रोड निर्माण एवं मरम्मत, सामुदायिक भवन, शेड निर्माण जैसे अनेकों महत्वपूर्ण कार्य प्रतिवर्ष स्वीकृत होते हैं। इन कार्यों की तकनीकी स्वीकृति, माप, निरीक्षण और क्रियान्वयन की पूरी प्रक्रिया ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग द्वारा नियंत्रित की जाती है।
लेकिन जब एक ही इंजीनियर तीन अलग-अलग क्षेत्रीय इकाइयों का प्रभार सँभाल रहा हो, तो यह उम्मीद करना कि वह सभी स्थानों पर समय पर उपस्थित होकर कार्यों को गति देगा, व्यावहारिक नहीं है।
ग्रामीण इलाकों में ऐसे अनेकों उदाहरण सामने आ रहे हैं, जहाँ फाइलें महीनों से लंबित हैं, पंचायतें बार-बार जनपद एवं जिला कार्यालय के चक्कर काट रही हैं, लेकिन स्वीकृति और निरीक्षण का समय नहीं मिल पा रहा। इसका सीधा असर विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
प्रशासनिक लापरवाही या मजबूरी
प्रश्न यह उठता है कि क्या जिले में इंजीनियरों की इतनी कमी है कि एक ही अधिकारी पर तीन महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंप दी जाए? क्या यह शासन की योजनाओं और जनता के साथ खिलवाड़ नहीं है? प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि एक अधिकारी को यदि क्षमता से अधिक भार सौंपा जाता है, तो न केवल कार्य प्रभावित होता है, बल्कि भ्रष्टाचार, अनियमितता, और प्रशासनिक विफलता की संभावना भी बढ़ जाती है।
विभागीय संरचना पर प्रश्नचिन्ह
यह भी विचारणीय है कि ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग की संरचना इस प्रकार बनाई गई है कि प्रत्येक जनपद में एक एस.डी.ओ. नियुक्त होता है और जिला स्तर पर एक कार्यपालन अभियंता होता है। यदि इन पदों पर नियमित नियुक्ति नहीं की गई है, तो यह विभागीय उदासीनता को दर्शाता है। इससे न केवल विकास योजनाओं की समयसीमा पर असर पड़ता है, बल्कि शासन के ‘समयबद्ध, पारदर्शी और जनोन्मुखी प्रशासन’ के दावे भी खोखले साबित होते हैं।