जिला

देवरी गूंजी नहर निर्माण से उठता एक सवाल… क्या सचमुच जिम्मेदारों पर गिरेगा गाज..? जांच नहीं, जवाब चाहिए..?

सक्ति,देवरी जलाशय और गूंजी नहर निर्माण कार्य में सामने आई गड़बड़ियां अब सिर्फ तकनीकी खामियां नहीं, बल्कि सिस्टम के सड़ चुके ढांचे की कहानी कह रही हैं। हर बार की तरह अब भी वही सरकारी फार्मूला शिकायत, जांच टीम, खानापूर्ति, और फाइलों में दफन सच। देवरी जलाशय और गूंजी नहर विकास के नाम पर बंदरबांट का नया केंद्र बन गया हैं। जिस काम में पारदर्शिता और जनहित सर्वाेपरि होनी चाहिए थी, वहां अब ठेकेदार, अफसर और विभाग की मिलीभगत से केवल कमीशनखोरी और आंकड़ों की जादूगरी देखने को मिल रही है। अगर यही हाल रहा, तो यह जलाशय किसानों को पानी नहीं, केवल निराशा और सिस्टम की गंदगी की तस्वीर देगा। ग्रामीणों की बातों को नजरअंदाज करना, घटिया निर्माण को नजरअंदाज करना, और फिर दिखावे के लिए जांच बैठा देना। यह पूरा खेल जनधन की योजनाओं की लाश पर टिका हुआ एक मज़ाक बनकर रह गया है।

सरकार की ‘गुणवत्ता’ जमीन पर तोड़ रही है दम..?
एक ओर सरकार करोड़ों की योजनाओं का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर उन योजनाओं को निचले स्तर पर      र किया जा रहा है..? या फिर वाकई में पहली बार किसी ठेकेदार, इंजीनियर या जिम्मेदार अधिकारी की कुर्सी हिलेगी..?
क्या सचमुच जिम्मेदारों पर गिरेगा गाज..?
यदि इस बार भी कार्रवाई सिर्फ नोटिस और चेतावनी तक सीमित रह गई, तो यह समझ लीजिए कि आने वाले जल प्रोजेक्ट्स भी इसी लूटतंत्र का हिस्सा बन जाएंगे। जनता अब जांच नहीं चाहती नतीजा चाहती है। और अगर ये नतीजा नहीं आया, तो देवरी जलाशय भविष्य में विकास नहीं, प्रशासनिक निकम्मेपन की एक मिसाल बन जाएगा।

क्या फिर से सिर्फ खानापूर्ति ? या इस बार वाकई होगी कार्रवाई ?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह जांच भी महज दिखावा बनकर रह जाएगी, जैसा कि जिले में पहले कई मामलों में होता आया है..? या फिर इस बार प्रशासनिक कुंभकर्णी नींद से जागकर कोई ठोस कार्रवाई करेगा..?
देवरी जलाशय और गूंजी नहर सिर्फ एक जल परियोजना नहीं, बल्कि हज़ारों किसानों और ग्रामीणों की जीवनरेखा है। मगर जिस तरह निर्माण में गड़बड़ियों की परतें खुल रही हैं, वह साफ इशारा करता है कि यह जलस्रोत धीरे-धीरे भ्रष्टाचार का गंदा गढ़ बनता जा रहा है। जहां एक ओर प्रदेश सरकार गुणवत्तापूर्ण विकास की बात कर रही है, वहीं जमीनी हकीकत में ठेकेदारों और अधिकारियों की साठगांठ ने इस पूरी परियोजना को घोटाले की राह पर धकेल दिया है। देवरी जलाशय और गूंजी नहर में घटिया निर्माण का मुद्दा सिर्फ एक ठेकेदार या इंजीनियर की लापरवाही नहीं, बल्कि पूरे तंत्र की विफलता का खुला सबूत है।
भ्रष्टाचार पर राजनीतिक चुप्पी..जनप्रतिनिधि मौन क्यों..?
देवरी जलाशय और गूंजी नहर निर्माण की घटिया गुणवत्ता की गूंज अब सिर्फ गांवों तक सीमित नहीं रही, यह अब सत्ता के गलियारों तक पहुंच चुकी है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि भ्रष्टाचार पर राजनीतिक चुप्पी या जनप्रतिनिधि मौन क्यों..?

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