भाटापारा जीएसटी विभाग में गुपचुप भर्ती कांड का बड़ा खुलासा नियमों की धज्जियां उड़ाकर नियुक्ति दोषियों पर कार्रवाई की उठी जोरदार मांग
बिहान छत्तीसगढ़ गोविंद राम ब्यूरो चीफ बलौदा बाजार
भाटापारा:-राज्य कर सहायक आयुक्त वृत्त भाटापारा कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी के 4 पदों पर नियमविरुद्ध, गुपचुप और मनमानी भर्ती किए जाने का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। सूचना का अधिकार (आरटीआई) से प्राप्त दस्तावेजों ने विभागीय गोलमाल के उस पूरे खेल को बेनकाब कर दिया है, जिसे तीन साल से पर्दे के पीछे खेला जा रहा था।आरटीआई दस्तावेजों से खुलासा हुआ है कि कार्यालय में आदेश वाहक, फर्राश और चौकीदार जैसे पदों पर
हरदीप सिंह (11-11-2022), विक्रम भटनागर (02-01-2023), प्रियांशु सिंह ठाकुर (02-02-2023) और त्रियोगी (10-05-2023) को चुपचाप नियुक्त कर लिया गया। न तो कोई विज्ञापन निकला, न किसी प्रकार की चयन प्रक्रिया अपनाई गई, न ही किसी स्तर पर अनुमोदन लिया गया, सीधे नियुक्ति आदेश जारी कर दिए गए। जों की रोजगार में समान अवसर का अधिकार देने वाले संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 की खुलेआम अवहेलना करते हुए नियम-कानूनों को किनारे लगा दिया गया। बेरोजगार युवाओं को प्रतियोगिता का अवसर देना तो दूर, भर्ती की सूचना तक सार्वजनिक नहीं की गई। यह सीधा-सीधा भ्रष्टाचार और सत्ता का दुरुपयोग है। सूत्र बताते हैं कि यह सभी नियुक्तियां विभागीय अधिकारी मनोज चंदेल द्वारा निजी संपर्क और सिफारिशों के आधार पर की गईं। न मेरिट लिस्ट, न जांच भर्ती पूरी तरह कागजों के अंधेरे में निपटा दी गई।
सबसे हैरानी की बात यह कि जिन लोगों को चौकीदारी व अन्य पदों पर नियुक्त दिखाया गया है, वे कार्यालय में कंप्यूटर टाइपिंग, निजी काम और वाहन चलाने जैसे बिल्कुल अलग कार्य करते देखे गए। सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार एक व्यक्ति ने तो तीन वर्षों में एक दिन भी चौकीदारी नहीं की।
शिकायतकर्ता द्वारा जिला कलेक्टर जनदर्शन में 22 अक्टूबर 2024 को शिकायत (क्रमांक 2270124000849) दर्ज कराई गई थी। 28 अक्टूबर को जांच आदेश जारी हुआ और 26 नवंबर 2024 की नोटशीट में राज्य कर विभाग द्वारा कार्रवाई का उल्लेख भी है, परंतु आज तक दोषी अधिकारी के खिलाफ कोई विभागीय कार्रवाई नहीं की गई।
सूत्रों के अनुसार वृत्त कार्यालय द्वारा अब सूचना पटल पर विज्ञापन चस्पा होने का झूठा जवाब तैयार किया जा रहा है, जिससे दोषी को बचाया जा सके। लेकिन शिकायतकर्ता ने पहले ही आरटीआई के माध्यम से प्रमाणित कर लिया है कि कभी कोई विज्ञापन जारी ही नहीं किया गया था। यदि झूठा प्रतिवेदन भेजने का प्रयास किया गया, तो इसके हस्ताक्षरकर्ताओं को भी जवाबदेह होना पड़ेगा।
शिकायतकर्ता के अनुसार अक्टूबर 2025 में जब उन्होंने कार्रवाई का अपडेट पूछा, तो मामले को दबाने की कोशिश में उन्हें भी चतुर्थ श्रेणी पद पर टाइपिंग टेस्ट देकर अगले दिन से जॉइनिंग का प्रस्ताव दिया गया, और कहा गया कि वेतन निजी रूप से दिया जाएगा। उन्होंने इसे भ्रष्टाचार का हिस्सा बताते हुए मना कर दिया।
कार्यालय में सृजित पदों से अधिक लोग प्रस्तुत हैं, जिनको तीन साल से सरकारी मद से वेतन दिया जा रहा है, जिसके कारण शासन को लगातार राजस्व नुकसान हो रहा है। विभागीय मिलीभगत ने इस अनियमितता को और मजबूत किया है। साथ ही अनियमित तरीके से रखे गए इन लोगों को अब तीन साल का अनुभव मिल चुका है, जिसका उपयोग वे भविष्य की भर्ती में अंक हासिल करने के लिए कर सकते हैं। यह भ्रष्टाचार को लगातार बढ़ावा देने वाली खतरनाक श्रृंखला है। दोषी अधिकारी पर तत्काल निलंबन, वेतनवृद्धि रोकने
,राजस्व नुकसान की वसूली
की जोरदार मांग की जा रही है।
18/08/2025 को जांच अधिकारी के समक्ष बयान और साक्ष्य भी प्रस्तुत किए जा चुके हैं। यदि समयसीमा में सरकार कार्रवाई नहीं करती तो
जन आंदोलन,हस्ताक्षर अभियान,मुख्यमंत्री को पत्राचार
के माध्यम से व्यापक सार्वजनिक संघर्ष की चेतावनी दी गई है। यह मामला सिर्फ चार नियुक्तियों का नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र में बैठे उन हाथों का खुलासा है जो अधिकारों को कुचलते हुए गुपचुप तरीके से भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते हैं। अब जनता की नजरें विभागाध्यक्ष और सचिव पर है।क्या वे दोषी को बचाएंगे या न्याय का पालन करेंगे।