पंचनामा में उलझी पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट के इंतज़ार में न्याय नगर वासियों का कहना हैं कि “संबंधित लोगों के तगड़े लिंक, इसलिए रेंग रही कार्रवाई”
न्यूज़ जांजगीर-चांपा
राजश्री वस्त्रालय में दीपावली की पूर्व संध्या पर हुए मजदूर दुर्गेश की करेंट से मौत के मामले में पुलिस की सुस्ती और देरी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
घटना को तीन दिन से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अब तक पंचनामा की औपचारिकता में ही उलझी हुई हैं । सूत्रों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रतीक्षा को कारण बताकर आगे की कार्रवाई रोक दी गई हैं , जबकि प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों का कहना है कि मामले में देरी जानबूझकर की जा रही है ताकि “बड़ी मछलियों” को बचाया जा सके।
नगर में बढ़ता आक्रोश- ‘लिंक तगड़े हैं, इसलिए दब रहा सच’।
नगरवासियों का कहना हैं कि हादसे से जुड़े लोगों के प्रदेश स्तर के बड़े प्रभावशाली नेता से गहरे संबंध हैं ।
इसी वजह से पुलिस तेजी से कार्यवाही करने से बच रही हैं ।
स्थानीय व्यापारी के एक सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा — “अगर ये किसी आम आदमी की गलती होती तो अब तक जेल हो गई होती । लेकिन यहां मामला बड़े लोगों से जुड़ा है, इसलिए सबकुछ धीमी गति से चल रहा हैं ।”
पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनी बहाना , न्याय की राह लंबी।
मृतक का पोस्टमार्टम पूरा हो चुका है, लेकिन अब तक रिपोर्ट पुलिस को नहीं सौंपी गई है।
परिजनों ने आरोप लगाया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट रोकी जा रही है ताकि समय बीते और सबूत कमजोर पड़ जाएं ।
परिजनों ने कहा — “तीन दिन से पुलिस सिर्फ कागज़ देख रही है,
पर जिसने हमारा घर उजाड़ा, वो अब भी आज़ाद घूम रहा हैं ।”
सवाल जनता का — जवाब कौन देगा ?
कब तक जांच “रिपोर्ट आने की प्रतीक्षा” में अटकी रहेगी?
क्या पुलिस प्रभावशाली लोगों के दबाव में है?
कब तक मजदूरों की मौत को हादसा बताकर फाइलें बंद की जाती रहेंगी ?
“पुलिस कह रही है रिपोर्ट का इंतज़ार है,पर शहर कह रहा हैं — अब सब्र का नहीं, न्याय का वक्त है।