क्राइम

सूदखोरी के खतरनाक जाल का अंत प्रेस क्लब बलौदाबाजार की जुझारू लड़ाई से जेल पहुंचे पिंकी सिन्हा और हेमलाल सिन्हा

बलौदाबाजार

जिस सूदखोरी के जाल ने अनगिनत निर्दोषों की ज़िंदगी तबाह कर दी थी, आखिरकार उस जाल का ध्वंस हो गया। शहर में भय और अवैध वसूली का साम्राज्य चलाने वाले दम्पति पिंकी सिन्हा और हेमलाल सिन्हा को पुलिस ने गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है। आवेदक हेमंत कन्नौजे, निवासी ठाकुर देव चौक पुरानी बस्ती बलौदाबाजार ने थाना सिटी कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई कि आरोपियों हेमलाल सिन्हा (48 वर्ष) एवं उसकी पत्नी पिंकी सिन्हा (42 वर्ष), निवासी सी-4 राधा विहार कॉलोनी ने ब्याज में दिए गए रुपये की अदायगी के बावजूद खाली चेक वापस नहीं किया और उसमें अधिक रकम भरकर बाउंस कर दिया। विरोध करने पर आवेदक से मारपीट कर जान से मारने की धमकी दी गई।


प्रकरण में अपराध क्र. 951/2025 के तहत धारा 420, 506, 384, 34 भादवि एवं 04 कर्जा अधिनियम के अंतर्गत मामला दर्ज कर  4 अक्टूबर 2025 को विधिवत गिरफ्तार किया गया। लेकिन यह गिरफ्तारी इतनी आसान नहीं थी। इसके पीछे है प्रेस क्लब बलौदाबाजार का साहसिक संघर्ष, जिसने जनहित की आवाज़ बनकर प्रशासन से लेकर राजधानी तक इस मुद्दे को गरजते हुए उठाया। पिंकी और हेमलाल सिन्हा पर आरोप है कि उन्होंने सूदखोरी के आड़ में भयादोहन का ऐसा खतरनाक जाल बिछाया, जिसमें जरूरतमंदों को ब्लैंक चेक और स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर करवाकर फँसाया जाता था। मनमाने ब्याज की वसूली, धमकी, ब्लैकमेलिंग और विरोध करने वालों के खिलाफ झूठे मुकदमों की धमकियाँ देना इनका सामान्य तरीका था। जिन्होंने भी इनके काले कारनामों को उजागर करने की कोशिश की, उन्हें डराने–धमकाने में भी ये पीछे नहीं हटे। इसी बीच, जब स्थानीय पुलिस प्रशासन की निष्क्रियता और लापरवाही उजागर हुई, तब प्रेस क्लब बलौदाबाजार ने इस मामले को जनहित का मुद्दा बनाते हुए निर्णायक भूमिका निभाई। क्लब अध्यक्ष नरेश गनशानी के नेतृत्व में पत्रकारों ने न केवल पीड़ितों की व्यथा को मंच तक पहुँचाया बल्कि इस सूदखोरी गिरोह की जड़ तक जाने की ठान ली। नगर से लेकर राजधानी रायपुर तक क्लब के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर, एसपी, डीजी, आईजी सहित कई उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे। जब प्रशासन ने देर की, तब प्रेस क्लब ने आंदोलन की चेतावनी दी, जिसके बाद कलेक्टर दीपक सोनी ने पुलिस को कड़ी फटकार लगाई। इस दबाव का ही परिणाम था कि अंततः आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 506, 34 के तहत अपराध दर्ज हुआ।

हालांकि, इसके बाद भी स्थानीय पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार करने में टालमटोल कर रही थी, जिससे संदेह हुआ कि कहीं न कहीं प्रशासनिक संरक्षण तो नहीं मिल रहा? तब प्रेस क्लब के सदस्यों ने रायपुर पहुँचकर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज से मुलाकात की, ज्ञापन सौंपा और सख्त कार्रवाई की मांग की। इस संयुक्त प्रयास और पत्रकारिता की सशक्त आवाज़ का ही नतीजा है कि आज पिंकी सिन्हा और हेमलाल सिन्हा सलाखों के पीछे हैं। फिलहाल पूरे जिले में इस गिरफ्तारी की चर्चा है। जिन लोगों ने वर्षों तक भय में जीवन बिताया, वे आज चैन की साँस ले रहे हैं। कई पीड़ितों ने प्रेस क्लब को धन्यवाद संदेश भेजे हैं। जिसमें कोई अपना घर बेचकर भागा था, कोई आत्महत्या की कगार पर था, कोई कोर्ट-कचहरी में फँस गया था। इन सबकी पीड़ा को आवाज़ देने का काम प्रेस क्लब बलौदाबाजार ने किया।
शहरवासियों का कहना है कि जिस तरह रावण दहन बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक होता है, उसी तरह आज बलौदाबाजार में सूदखोरी के इस राक्षस के अंत पर लोग राहत और खुशी महसूस कर रहे हैं।
नगर के कोने-कोने में चर्चाएँ हैं कि अगर प्रेस क्लब बलौदाबाजार आवाज़ न उठाता, तो शायद यह गिरोह आज भी निर्दोषों को लूट रहा होता। अध्यक्ष नरेश गनशानी ने कहा कि प्रेस क्लब बलौदाबाजार सदैव जनहित की लड़ाई लड़ता रहेगा। हमारी लेखनी सिर्फ़ शब्द नहीं, बल्कि समाज की आवाज़ है। जब तक किसी पीड़ित को न्याय नहीं मिलता, हम चुप नहीं बैठेंगे। आज यह सफलता न केवल प्रेस क्लब की जीत है, बल्कि पत्रकारिता की उस भावना की जीत है, जो अन्याय के खिलाफ डटकर खड़ा रहेगा।

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