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आत्मविश्वास जिनका ईश्वर ******* आज हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी पचहत्तर वर्ष के हो गये।

 आज हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी पचहत्तर वर्ष के हो गये। उन्हें हृदय की अनंत गहराइयों से जन्मदिन की शुभकामनाएँ। आज एकादशी तिथि है और भगवान विश्वकर्मा जी की जयंती भी है। ऐसे पावन दिवस में संयोगवशात्  पड़े  आदरणीय प्रधानमंत्री  जी के जन्मदिवस को उनके लिए और हम सबके लिए सौभाग्यसूचक मानता हूंँ। 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे इस व्यक्तित्व को आज पूरा विश्व जानता और मानता है। 
        26 मई, 2014 को नरेन्द्र मोदी जी के भारत के चौदहवें प्रधानमंत्री बनने के उपरांत उनकी भाषण-कला और दूरदर्शी सोच के प्रति लोगों की दीवानगी सर चढ़कर बोलने लगी। आत्मविश्वास से लबरेज भाषण देते वक्त उनकी आंगिक भाषा लोगों के भीतर रोमांच और अभूतपूर्व शक्ति का संचार कर देती थी।  छाती चौड़ी कर बाजुओं को उठाकर उनके वाक्य-वितरण और प्रतिपादन  की विलक्षण शैली ने सबको सम्मोहित किया।  मन में अच्छे विचारों का जन्म लेना और उन्हें ज्यों का त्यों लोगों के हृदय तक पहुंँचाना अत्यंत कठिन कार्य है। मोदी जी इस हुनर में निष्णात हैं। अभिव्यक्ति और सम्प्रेषणीयता दोनों ही बातें इन्हें बखूबी आती हैं। 
        दृढ़ संकल्पी प्रधानमंत्री के रूप में उनके अनेक कार्यों में कतिपय उल्लेखनीय निर्णय और महान कार्यों ने पूरे राष्ट्र को प्रसन्नता और गौरव से भर दिया।  इनमें पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाना, कश्मीर से धारा 370 हटाना,  राममंदिर प्रकरण का निराकरण करना एवं भव्य मंदिर का निर्माण, तलाक कानून का खात्मा आदि शामिल हैं। भारत सरकार की महत्वाकांक्षी योजना "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ।" जो 22 जनवरी, 2015 को पानीपत हरियाणा से आरंभ हुई थी, आज राष्ट्रव्यापी बन चुकी है। इसका उद्देश्य लड़कियों के प्रति नकारात्मक रवैये और भेदभाव को मिटाकर उन्हें शिक्षा जैसे मौलिक और बुनियादी अधिकारों को मुहैय्या कराना है।  ताकि देश का सर्वांगीण विकास हो सके। यह कार्य वास्तव में वंदनीय है।  स्त्री-सुरक्षा के सख्त कानून ने आज माँ-बहनों को काफी हद तक महफूज किया है।  घर-घर में प्रसाधनों की व्यवस्था और स्वच्छता अभियान को सफल बनाकर उन्होंने देश की गरिमा बढ़ायी है। 'ऑपरेशन सिंदूर' से देश का मनोबल बढ़ाया। टैरिफ मसले में अमेरिकी रवैये के जवाब में उनकी छवि उच्चकोटि की कूटनीति में दक्ष नेता के रूप में बनकर उभरी है।        
        भारतीय जनमानस को हेयता से मुक्ति दिलाकर स्वाभिमान से भर उठने,  स्वदेशी उत्पादों के प्रति आकर्षण और आत्मनिर्भरता का पाठ सिखाने की मोदी जी की प्रेरणा को पूरा भारत नमन् करता है। 
        वैश्विक महामारी 'कोरोना-काल' में आदरणीय प्रधानमंत्री मंत्री जी ने जिस प्रकार धैर्य, सूझ-बूझ और आध्यात्मिकता का अवलंबन लेकर इस विपत्ति से सबको निकालने का प्रयास किया; वह उनके श्रेष्ठ मुखिया होने का प्रमाण है।  इनके प्रधानमंत्री बनने के बाद हर भारतवासी को यह अवश्य लगता है कि हमारे देश के संरक्षक हमें हर परिस्थितियों से निकाल लेंगे।  उन्होंने हमारी सेना के भीतर भी प्राण-सुधा का सिंचन किया है। 
        मेरी समझ में राजा दो प्रकार के होते हैं। एक प्रकार का सोचता है कि वह जब तक सत्ता में है, सब ठीक चले। बाकी के लिए वह अपने को भूमिका-विमुख समझता है। दूसरे प्रकार का राजा अपने कार्यकाल में देश को उन्नत तो बनाता ही है, भविष्य में भी उसके समुन्नत होने की कामना करता है।  मेरे ख्याल से मोदीजी का आदर्शवाद भी यही कहता है।  उन्होंनेे 'योग' को विश्वविख्यात बनाने में पूरा योग दिया। 
        विराट शख्शियतों की गुणराशि को बखान पाना मुझ जैसे छोटे कलमकारों के वश की बात नहीं है।  मैं तो उन्हेें जन्मदिवस की शुभकामनाएंँ देने के बहाने कुछ लिख पाया, इसकी मुझे परम प्रसन्नता है।
        प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी निरापद, स्वस्थ रहते हुए शतायु बनें, भगवान से यही प्रार्थना है।  
        मैं किसी दल विशेष का न तो पक्षधर हूँ, और न ही किसी का विरोधी।  मैं विशुद्ध साहित्यिक व्यक्ति हूँ।  साहित्यकार को जो भी व्यक्तित्व प्रभावित करता है, और जब-भी उसकी कलम छटपटाती है, वह उस पर लिखता है।  चाहे वह किसी भी दल का नेता हो, साहित्यकार, संगीतकार, कलाकार या फिर कोई भी प्रेरक व्यक्ति।
        हम सब याद रखें, कोई महान व्यक्ति, राजनेता, वैज्ञानिक आदि हस्तियांँ कोई समुदाय या दलविशेष की नहीं होतीं; वे सार्वजनीन होती हैं। हमें उनकी उत्तमता को हृदयंगम करना चाहिए। 
                   जयहिंद।
                           ----             - महेश राठौर 'मलय'
                                                     पूर्व अध्यक्ष, 
                         अक्षर साहित्य परिषद्, चाँपा (छ.ग.)

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