इमरान खोखर ब्यूरो चीफ मुंगेली
मुंगेली। शहर की सड़कों पर इन दिनों आवारा गौवंशों का बढ़ता जमावड़ा आम नागरिकों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन गया है। नगर के प्रमुख चौक-चौराहों, बाजार क्षेत्रों और मुख्य मार्गों पर बड़ी संख्या में मवेशी सड़क के बीचोंबीच बैठे दिखाई दे रहे हैं। स्थिति ऐसी बन गई है कि तेज रफ्तार से गुजरने वाले वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाकर अपनी गति धीमी करनी पड़ रही है। स्थानीय लोग व्यंग्य में इन्हें अब "प्राकृतिक स्पीड ब्रेकर" कहने लगे हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि यह समस्या किसी भी समय बड़े सड़क हादसे का कारण बन सकती है।
मुंगेली में युवाओं और नाबालिगों द्वारा तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने की शिकायतें पहले से ही सामने आती रही हैं। ऐसे में सड़क पर बैठे गौवंश अनजाने में वाहनों की रफ्तार तो कम कर रहे हैं, लेकिन इससे दुर्घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ गया है। कई बार वाहन चालक अचानक सामने बैठे मवेशियों को बचाने के प्रयास में संतुलन खो देते हैं, जिससे दुर्घटनाएं हो जाती हैं।
रात के समय सबसे ज्यादा खतरा
दिन की अपेक्षा रात के समय यह समस्या और गंभीर हो जाती है। पर्याप्त रोशनी नहीं होने के कारण सड़क पर बैठे मवेशी दूर से दिखाई नहीं देते। ऐसे में तेज गति से आने वाले दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों को अचानक ब्रेक लगाना पड़ता है। कई बार वाहन फिसल जाते हैं या आमने-सामने की टक्कर जैसी स्थिति बन जाती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई छोटे-बड़े हादसे केवल इसलिए हुए क्योंकि सड़क के बीच बैठे मवेशी समय रहते दिखाई नहीं दिए।
राष्ट्रीय और प्रमुख मार्ग भी नहीं सुरक्षित
समस्या केवल शहर के भीतर तक सीमित नहीं है। बिलासपुर, रायपुर, पंडरिया और लोरमी को जोड़ने वाले प्रमुख मार्गों पर भी बड़ी संख्या में गौवंश बैठे नजर आ रहे हैं। इन व्यस्त मार्गों पर लगातार भारी वाहनों का आवागमन रहता है, जिससे दुर्घटना की आशंका और अधिक बढ़ जाती है।
कई स्थानों पर मवेशियों के कारण यातायात धीमा पड़ जाता है और जाम जैसी स्थिति भी बन जाती है। इससे आम नागरिकों के साथ-साथ एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आपातकालीन सेवाओं के संचालन में भी बाधा उत्पन्न होने का खतरा बना रहता है।
बारिश में और बढ़ जाती है समस्या
बरसात के मौसम में यह समस्या और विकराल रूप ले लेती है। बारिश से बचने और गर्म सड़क की वजह से बड़ी संख्या में मवेशी सड़क पर ही बैठ जाते हैं। कई पशुपालक भी इस मौसम में अपने मवेशियों को खुला छोड़ देते हैं, जिससे वे पूरे दिन और रात सड़कों पर घूमते रहते हैं।
बारिश के दौरान दृश्यता कम होने के कारण दुर्घटनाओं की संभावना और बढ़ जाती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इस समस्या के लिए जिम्मेदार कौन है—मवेशी या उन्हें खुले में छोड़ने वाले उनके मालिक?
टैगिंग व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
प्रशासन ने पूर्व में मवेशियों की पहचान के लिए टैग लगाने का अभियान चलाया था, ताकि आवारा घूमने वाले पशुओं के मालिकों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा सके। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकांश मवेशियों में लगे टैग या तो क्षतिग्रस्त हैं, पढ़ने योग्य नहीं हैं अथवा उनमें त्रुटियां हैं। इसके कारण संबंधित पशु मालिकों की पहचान करना कठिन हो जाता है।
लोगों का कहना है कि यदि टैगिंग व्यवस्था प्रभावी होती और उसकी नियमित निगरानी होती तो जिम्मेदार पशु मालिकों पर कार्रवाई करना आसान होता।
प्रशासन के निर्देश, लेकिन असर नहीं
कुछ दिन पहले जिला प्रशासन ने आवारा गौवंशों की समस्या को गंभीर मानते हुए पशु चिकित्सा विभाग, नगर पालिका, जनपद पंचायतों और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए थे। पशु मालिकों को भी अपने मवेशियों को सड़क पर खुला नहीं छोड़ने की हिदायत दी गई थी।
इसके बावजूद जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई उल्लेखनीय सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की अधिकांश सड़कों पर आज भी मवेशियों का जमावड़ा पहले की तरह बना हुआ है।
पशु मालिकों की जवाबदेही तय करने की मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि केवल मवेशियों को पकड़कर गौशालाओं में भेजना पर्याप्त नहीं होगा। जब तक पशु मालिकों की जवाबदेही तय नहीं होगी और उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक यह समस्या समाप्त नहीं होगी।
नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि नियमित अभियान चलाकर सड़क पर घूमने वाले मवेशियों को गौशालाओं में भेजा जाए, टैगिंग व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए तथा लापरवाही बरतने वाले पशु मालिकों पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन का पक्ष
अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अजय शतरंज ने बताया कि सड़कों पर बैठे मवेशियों की समस्या को लेकर पशु चिकित्सा विभाग, जनपद पंचायत और नगर पालिका को आवश्यक निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित विभागों को सड़क पर मवेशियों का जमावड़ा रोकने के लिए अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही पशु मालिकों को अपने मवेशियों को सड़कों पर खुला नहीं छोड़ने की हिदायत भी दी गई है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और संबंधित विभागों के समन्वय से समस्या के स्थायी समाधान के प्रयास किए जा रहे हैं।