राज्य

लोक निर्माण विभाग अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय की जा रही मनमानी

चांपा।

अनुविभागीय अधिकारी लोक निर्माण विभाग कार्यालय में मनमानी का दौर खत्म नहीं हो रहा है। नियम-कानून की धज्जियां उड़ाते हुए यह कार्यालय चर्चा का विषय बन गया है। कार्यालय का ताला समय पर नहीं खुलता है, अधिकांश समय अधिकारी-कर्मचारी उपलब्ध नहीं रहते। सुबह से सूना रहता है कार्यालय समय की नहीं परवाह सुबह 10:30 बजे कार्यालय खुलने का समय है, लेकिन हकीकत यह है कि 11:30 बजे तक भी ताला लटका रहता है। जो कर्मचारी आते भी हैं, वे सीधे कुर्सी पर लात टिकाकर मोबाइल चलाने लगते हैं। न फाइल की फिक्र, न जनता की सुनवाई। मानो विभागीय दफ्तर नहीं, किसी का निजी बैठकखाना हो। बताया जा रहा है कि एसडीओ साहब खुद विभागीय अनुशासन के प्रति लापरवाह हैं। नतीजतन अधीनस्थ कर्मचारी भी उन्हीं का अनुसरण कर रहे हैं। न कोई हाजिरी चेक होती है, न ही काम के प्रति कोई जवाबदेही नजर आती है। विभाग में न कोई डर है।

ठेकेदार लगाते रहते हैं चक्कर

दफ्तर समय पर नहीं खुलने से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। निर्माण से जुड़ी योजनाएं, स्वीकृतियां, मरम्मत कार्य, निविदा संबंधी फाइलें और भुगतान जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में अनावश्यक विलंब हो रहा है। ठेकेदारों को कई-कई बार चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती।

कार्यालय की लापरवाही की चर्चा शहर में

चांपा के लोक निर्माण विभाग में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यह न सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि आम जनता के साथ सीधा अन्याय भी है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो यह कार्यालय अकर्मण्यता और गैरजवाबदेही का अड्डा बनकर रह जाएगा। स्थानीय जनों ने मांग की है कि उच्चाधिकारियों को दैनिक निरीक्षण करना चाहिए। कर्मचारियों की हाजिरी पर सख्त निगरानी रखें, जनता की शिकायतों की सुनवाई हो।


रटा रटाया जवाब दौरे पर हैं साहब 

जब भी संबंधित विभाग के अधिकारियों या फिर कर्मचारियों से  को पूछा जाता है कि अधिकारी कहां हैं, तो एक ही रटा रटाया जवाब मिलता है-साहब दौरे पर हैं। लेकिन वह दौरा कहां का है, किस काम से है-इसका कोई रिकॉर्ड या जानकारी नहीं दी जाती। कहीं यह दौरा सिर्फ बहाना तो नहीं।

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