गरीबों के आशियाना व रोजी-रोटी पर खतरा, भरी बारिश में राजस्व विभाग का बेजा कब्जा हटाने चला रही मुहिम
चांपा-
प्रदेश सहित जिले में मानसून आगमन के साथ ही प्रशासन एक बार फिर बेजा कब्जा हटाओ अभियान को लेकर समाचार चैनलों के सुर्खियों में आ चुका है, और हित्तग्राही सहित आम जनता प्रशासन से यह जानना चाहता है आखिरकार मानसून आगमन के साथ ही हर वर्ष अधिकारियों को अवैध कब्जा हटाने को लेकर इतना तत्पर क्यों हो जाते हैं कि चारों तरफ अवैध कब्जा धारियों के मध्य हंगामा होना प्रारंभ हो जाता है, प्रसंग वस उल्लेख कर दें कि चैनल और संवाददाता अवैधानिक कब्जा धारी पर कार्यवाही के खिलाफत नहीं करते, लेकिन कार्यवाही के लिए जो समयावधि चुना जाता है वह जरूर सवालों के घेरे में होता है, और एक बार फिर यही अंजाम देखने को मिल रहा है
, जिसे लेकर तहसील स्तर के अधिकारी कब्जा हटाओ का झंडा हाथ में लेकर यहां वहां घूमते फिर रहे हैं। प्रदेश के अन्य जिलों की बात यदि ना भी करें तो भी जांजगीर चांपा जिले में पिछले कई सालों से जिला प्रशासन से लेकर तहसील स्तर के अधिकारी मानसून प्रारंभ होती गरीब असहाय जनों का आशियाना सहित रोजी-रोटी पर सेंध मारी करना नहीं भूलते और कब्जा हटाओ अभियान पर युद्ध स्तर में जुट जाते हैं, जो अब जिले भर के समाचार पत्रों में सुर्खियां बटोरी जा रही है, और कार्रवाई से प्रभावित सहित आम जनता प्रशासन से यह पूछने पर आमादा है कि वे मानसून आते ही बेजा कब्जा हटाने के लिए क्यों व्याकुल हो जाते हैं, जिले के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि आखिरकार यह क्यों भूल जाते हैं कि अवैध कब्जा हटाने के लिए मानसून का आगमन सहित मानसून के दौरान इस तरह का कार्यवाही करना अव्यावहारिक और अलोकतांत्रिक क्यों नहीं समझा जाता
यही कार्ययोजना किसी अन्य मौसम में भी तो प्रोटोकॉल का पालन करते हुए नियमों के अधीन कार्यवाही कर बेजा कब्जा हटाने के लिए की जा सकती है, पर यह जिले का पुरातन परंपरा का पालन अधिकारी करना नहीं भूलते और गरीबों के आशियाना से लेकर रोजी-रोटी पर झमाझम बारिश के मध्य भी अवैध कब्जाधारी सहित बेजा कब्जा हटाने के लिए दलबल और लव लश्कर के साथ गरीबो पर टूट पड़ते हैं, और यही इन दिनों जिला उप मुख्यालय चांपा क्षेत्र में देखने को मिल रहा है, उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले जिला उप मुख्यालय चांपा के निकट ग्राम कुरदा में युद्ध स्तर पर कब्जा हटाओ अभियान को अमलीजामा पहनाया जा चुका है, और अब नगर के प्रवेश द्वार गेमन पुल के पास सब्जी विक्रेताओं सहित छोटे-मोटे व्यवसाईयों को दल बल के साथ नोटिस देने सहित बेजा कब्जा हटाओ अभियान में पहुंचने की खबर संवाददाता को लगी है, इस पर प्रशासन से यही प्रश्न किया जा सकता है,
कि आखिरकार मानसून के आते ही जिले के राजस्व अधिकारियों को अवैध कब्जा हटाने का धुन सवार क्यों हो जाता है, सवाल उठ खड़े होते हैं..., कब्जा होते ही कार्यवाही क्यों नहीं की जाती? यह प्रश्न हमेशा से लंबित होता रहा है कि आखिरकार जिला सहित तहसील स्तर के राजस्व अधिकारी एवं कर्मचारी अपने क्षेत्र में निगरानी क्यों नहीं रखते, क्यों अवैध कब्जा होते तक इंतजार किया जाता है, यहां तक की बेजा कब्जा कर प्रशासन को चुनौती देने तक के लिए अवैध कब्जाधारियों को फलने-फूलने दिया जाता है, और जब वे अपना आशियाना खड़े कर अथवा रोजी-रोटी कमाने के लिए उठ खड़े होते हैं तो प्रशासन के जिम्मेदार लोग कब्जा हटाओ अभियान का झंडा लिए गरीब एवं असहयों पर टूट पड़ते हैं, क्या यह जायज ठहराया जा सकता है, क्यों नहीं राजस्व विभाग इस तरह से बेजा कब्जा करने वालों पर निगरानी करते हुए अवैध कब्जा करने के पहले उन्हें हटाने का कवायत क्यों नहीं करते, यह एक बड़ा प्रश्न प्रशासन के कार्य प्रणाली पर खड़े होते रहे हैं जिस पर उत्तर आना हमेशा से लंबित रहा है।