शर्मनाक आदेश! स्वास्थ्य व्यवस्था उजागर हुई तो सरकार ने लगाया मीडिया पर प्रतिबंध
जांजगीर चांपा।
प्रदेश की चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था पर जब सवाल उठने लगे मरीजों की चीखें और परिजनों की बेबसी जब कैमरों में कैद होने लगी तब सरकार ने एक ऐसा फरमान जारी कर दिया जिसने लोकतंत्र की जड़ों को हिला दिया। अब प्रदेश के किसी भी सरकारी अस्पताल में मीडियाकर्मी न तो कवरेज कर सकेंगे न ही फोटो-वीडियो बना सकेंगे और न ही अव्यवस्थाओं को उजागर कर सकेंगे।
इस तुगलकी आदेश की पूरे प्रदेशभर में निंदा हो रही है। छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष ईश्वर दुबे ने इसे "पत्रकारों की स्वतंत्रता पर लगाया गया कुठाराघात बताया और कहा कि इससे पत्रकारों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।"
छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन के प्रदेश महासचिव और प्रेस क्लब चांपा के अध्यक्ष कुलवन्त सिंह सलूजा ने इसे ‘आपातकाल की तरह मीडिया का मुंह बंद करने की साजिश’ करार दिया है। उन्होंने साफ कहा कि यह आदेश मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है, और आम जनता के मूल अधिकारों का हनन है। सरकार की मंशा पर सवाल उठते हैं, जब सच्चाई सामने लाने वालों को रोका जाता है। श्री सलूजा ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकार ने इस शर्मनाक आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस नहीं लिया तो प्रदेशभर में पत्रकार संगठन जनहित में बड़ा आंदोलन करने को बाध्य होंगे।
छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन जांजगीर चांपा के जिलाध्यक्ष मूलचन्द गुप्ता ने कहा कि "सरकार से पत्रकार सुरक्षा कानून लाने की बात तो दूर जो वर्तमान में सुविधा है उसे भी खत्म करने में लगी है, शासन के इस तुगलकी फरमान से पत्रकार जगत में रोष व्याप्त है।" वहीं छत्तीसगढ़ प्रेस क्लब के जिलाध्यक्ष विक्रम तिवारी ने कहा कि "सरकार अपनी नाकामियां उजागर होने के डर से मीडिया पर रोकटोक लगा रहा है जो कि मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा प्रहार है।"
सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है डॉक्टरों की भारी कमी इलाज के अभाव में दम तोड़ते मरीज खराब मशीनें और अव्यवस्थित व्यवस्थाएं। अब इन सच्चाइयों को मीडिया दिखाएगा नहीं तो कौन दिखाएगा? सरकार का काम है कि अस्पतालों में कमियों और खामियों को दूर करना ताकि आम जनता का इलाज अच्छे से हो सके। यहां तो खामियों को दूर करने के बजाय मीडिया को दूर करने की कोशिश की जा रही है।