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पुरातात्विक हवेली में पर्यटकों हेतु विश्राम गृह बनाने की योजना ऐतिहासिक राजोबादेव (मगरदर्रा] पहाड़ी को विकसित किया जाएगा इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट टीम ने आकस्मिक निरीक्षण किया

 बालाघाट

/इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट के संग्रहाध्यक्ष डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार के नेतृत्व में विधान सभा क्षेत्र परसवाड़ा के अंतर्गत ग्राम पंचायत मगरदर्रा में पर्यटकों को विश्राम हेतु [हेरिटेज] पुरातात्विक महत्व की खंडित भग्नावशेष हवेलियों का आकस्मिक निरीक्षण दिनांक 8 जून 2025 को किया। निरीक्षण के दौरान चिन्तामन पटले वयोवृद्ध 85 वर्षीय से भेंट हुई। उन्होंने अपने पुर्खो की 18 वीं सदी की हवेली में लेकर गये। उन्होंने स्पष्ट बताया वे इस हवेली को तोड़कर, नया भवन बनाने चाहते थे

, किन्तु पुरातत्व नियम धरोहर संरक्षण के तहत इसे ध्वस्त नहीं किया, बंदरों का आवागमन हमेशा इस हवेली में होता रहता था, जिसके कारण कवेलू क्षतिग्रस्त होते-रहते थे, नुकसान ज्यादातर होता था, इसलिए कवेलू की जगह आकर्षक टीन लगाकर, हवेली का सुधारीकरण किया गया है। जो लकड़ी के अवशेष हवेली से निकले है, जिनकी नक्काशी आकर्षक है, उन्हें इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय बालाघाट में संरक्षित करने के लिए भेजा जायेगा। उक्त अवसर पर डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष ने अपने विचारों से अवगत कराया कि पर्यटक हमेशा भेड़ाघाट [जबलपुर], कान्हा किसली आते-जाते रहते है, उन्हें बालाघाट जिले की पुरातात्विक धरोहरों जैसे पादरीगंज की देवडोगरी, चांगोटोला,लामटा का नरसिंह मंदिर, ढुटी बांध,चरेगांव,मगरदर्रा का राजोबादेव, नेवरगांव (स.) के पुरातात्विक महत्व के अवशेष के बारे में उन मार्गों,स्थानों पर बोर्ड लगाकर अवगत कराया जाएगा और उनके विश्राम हेतु यह पुरातात्विक महत्व की हवेली उपयुक्त प्रतीत होती है। जिस पर चिन्तामन पटले ने अपनी सहमति व्यक्त की है।

डाॅ.वीरेन्द्र सिंह गहरवार संग्रहाध्यक्ष ने बताया विधान सभा परसवाड़ा में सर्वाधिक पुरातात्विक महत्व के भग्नावशेष यत्र-तत्र बिखरे पड़े है, उन स्थलों पर इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान शाखाओं का गठन करते हुए, पुरातात्विक महत्व के स्थलों की प्रतिमाओं को पीलर बनाकर व्यवस्थित रुप से रखा जाएगा, प्रतिमाओं का काल उन पिलरों पर अंकित किया जायेगा, टीन शेड, दरवाजा लगाकर संरक्षित और सुरक्षित किया जायेगा। समस्त प्रतिमाओं का पंजीयन किया जाएगा, जो ग्राम पंचायत स्तर पर संरक्षित नहीं कर सकती, उन प्रतिमाओं को संग्रहालय लाकर संरक्षित किया जायेगा, इन ग्राम पंचायतों में प्राचीन काल के अवशेष बर्तन, नागर-बखड़ आदि को संग्रहित किया जायेगा, वैसे ही प्राचीन कुंऐं को भी संरक्षित किया जाएगा। आकस्मिक निरीक्षण दौरान राजेन्द्र कुमार ब्रम्हे, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मण्डल नागपुर, सतीश भारद्वाज सदस्य पुरातत्व, ग्राम मगरदर्रा के रामदयाल राहंगडाले, यदुनन्दन पटले, रमेश पारधी पूर्व सरपंच ग्राम पंचायत आदि उपस्थित थे।

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