अगर फिर कोरोना आया तो कितना तैयार है छत्तीसगढ़
रायपुर
देश-दुनिया में कोरोना के केस फिर बढ़ने लगे हैं। एम्बुलेंस की आवाजें, ऑक्सीजन के लिए तड़पते मरीज और एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक बेड की उम्मीद लेकर दौड़ते परिजन..ये दिन गुजरे 2-3 साल ही हुए हैं। कोरोना का नया वेरिएंट JN.1 देश के कई राज्यों में एक्टिव हो चुका है। किसी भी हालात से निपटने के लिए प्रदेश का स्वास्थ्य महकमा कितना अलर्ट है? अस्पताल में ऑक्सीजन और बिस्तरों की क्या व्यवस्था है? RTPCR जांच की क्या स्थिति है
केवल मेडिकल कॉलेज या जिला अस्पताल में जांच की सुविधा बची है। अस्पतालों में RTPCR जांच के लिए मशीनें तो हैं, लेकिन जांच के सेंटर ढूंढने पड़ते हैं, एक तरह से जांच रुक गई है।
तेजी से फैलने वाले JN.1 वेरिएंट को पकड़ने के लिए RTPCR बेहद जरूरी है, लेकिन राज्य में मौजूदा जांच क्षमता कम है। एंटीजन टेस्ट भी सीमित ही किए जा रहे हैं।
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सरकारी अस्पताल DKS और अंबेडकर अस्पताल में अपना ऑक्सीजन प्लांट खड़ा किया गया था। जिससे मरीजों को वक्त पर सप्लाई मिल सके।
अब जब एक बार फिर कोविड के नए वेरिएंट की आहट है, तो जमीनी हकीकत ये है कि अस्पताल परिसर में लगे ये ऑक्सीजन प्लांट भी बंद पड़े हैं।
वहीं स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल के मुताबिक ऑक्सीजन प्लांट बंद होने के मामले में ठेकेदार की राशि रोकी गई है। ऑक्सीजन प्लांट के आल्टरनेट रूप में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध हैं।
इस बार संक्रमण के लिए ओमिक्रॉन के नए वेरिएंट JN1 और उसके सब-वेरिएंट्स LF7 और NB1.8 को जिम्मेदार माना जा रहा है।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि नए वेरिएंट पहले से ज्यादा खतरनाक या तेजी से फैलने वाले हैं।
फिर भी यह लहर कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों पर असर दिखा सकती है। क्योंकि मुंबई में 2 कोविड पॉजिटिव मरीजों की मौत हुई है।
डॉक्टरों का कहना है कि इनकी मौत कोविड से नहीं, बल्कि पुरानी बीमारियों की वजह से हुई है। एक मरीज को मुंह का कैंसर था और दूसरे को किडनी से जुड़ी बीमारी नेफ्रोटिक सिंड्रोम थी।