लवन में गूंजा सामाजिक समरसता का संदेश, अस्पृश्यता निवारणार्थ सद्भावना शिविर बना मिसाल आदिम जाति व अनुसूचित जाति विकास विभाग बलौदाबाजार के प्रयास से लवन में गूंजा समानता का स्वर
आदिम जाति व अनुसूचित जाति विकास विभाग बलौदाबाजार के प्रयास से लवन में गूंजा समानता का स्वर
गोविंद राम ब्यूरो चीफ
लवन :-आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग बलौदाबाजार के तत्वावधान में शनिवार को नगर पंचायत लवन के बस स्टैंड परिसर में अस्पृश्यता निवारणार्थ सद्भावना शिविर का भव्य,सुव्यवस्थित एवं अत्यंत प्रभावशाली आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन न होकर समाज में व्याप्त छुआछूत, जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के विरुद्ध एक सशक्त सामाजिक आंदोलन के रूप में सामने आया। कार्यक्रम ने सभी वर्गों को समान मंच पर लाकर सामाजिक समरसता, भाईचारा और मानवीय गरिमा का संदेश दिया।
छुआछूत के विरुद्ध एकजुट समाज का निर्माण
शिविर का मुख्य उद्देश्य समाज से छुआछूत जैसी अमानवीय प्रथा को जड़ से समाप्त करना, सामाजिक सौहार्द को सुदृढ़ करना तथा जाति, वर्ग और पंथ से ऊपर उठकर मानव-मानव के बीच समानता की भावना विकसित करना रहा। विभाग द्वारा यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि अस्पृश्यता केवल एक सामाजिक बुराई नहीं बल्कि मानवाधिकारों का उल्लंघन है, जिसका उन्मूलन स्थानीय, राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी एक साझा जिम्मेदारी है।
समता,समानता और न्याय पर सार्थक संवाद
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं जनप्रतिनिधियों ने मंच से सामाजिक समानता, संवैधानिक मूल्यों और समरस समाज की आवश्यकता पर विस्तार से अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने गुरु घासीदास के अमर संदेश मनखे-मनखे एक समान को आत्मसात करने का आह्वान किया और कहा कि यही विचार छत्तीसगढ़ की सामाजिक चेतना की आत्मा है।
साथ ही डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक न्याय, समान अधिकार और गरिमापूर्ण जीवन के सिद्धांतों तथा महात्मा गांधी द्वारा अस्पृश्यता के विरुद्ध चलाए गए आंदोलनों को स्मरण करते हुए समाज में व्यावहारिक बदलाव लाने पर बल दिया गया। शिविर का एक महत्वपूर्ण पक्ष कानूनी जागरूकता रहा। मंच से भारत के संविधान के अनुच्छेद 17, जिसमें अस्पृश्यता को पूर्णतः समाप्त घोषित किया गया है, की विस्तार से जानकारी दी गई। इसके साथ ही सिविल अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 के प्रावधानों को सरल भाषा में समझाया गया, ताकि आम नागरिक अपने अधिकारों और कर्तव्यों से भली-भांति परिचित हो सकें। आदिवासी विभाग के अधिकारियों ने विभाग की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं, छात्रवृत्ति, छात्रावास, स्वरोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन एवं एससी एसटी एक्ट के तहत राहत राशि की विस्तृत जानकारी साझा की, जिससे पात्र हितग्राहियों को सीधा लाभ मिल सके।
संस्कृति के माध्यम से संदेश
कार्यक्रम में छात्रावासों एवं स्कूली बच्चों द्वारा प्रस्तुत पंथी, सुवा, कर्मा और ददरिया जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि हमारी लोकसंस्कृति में समानता और सामूहिकता की भावना सदियों से विद्यमान है। कार्यक्रम स्थल पर बनाई गई संदेशप्रद चित्रकला एवं रंगोलियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। संत रैदास के जातिभेद-विरोधी दोहे-
जन्म जात मत पूछिए, का जात और पात।रैदास पूत सम प्रभु के, कोई नहीं जात कुजात।। को रंगोली के माध्यम से प्रस्तुत कर समाज को गहरे चिंतन का संदेश दिया गया।
अंतरजातीय विवाह कर जातिवाद के खिलाफ बनी प्रेरणादायी मिसाल
मानव-मानव एक समान के महान संदेश को व्यवहार में उतारते हुए जाति-पांति के भेदभाव को तोड़ने वाले अंतरजातीय विवाह करने वाले दम्पतियों को कार्यक्रम में विशेष रूप से सम्मानित किया गया। ग्राम छड़िया के आसकरण बघेल संग राधिका चंद्राकर, कसडोल के छबिलाल नायक संग सुनीता रात्रे, ग्राम खैदा के रजन सतनामी संग सविता साहू तथा बृजेश कुमार बंजारे संग सुनीता साहू को मंच पर अतिथियों द्वारा सम्मान प्रदान किया गया। इन दम्पतियों ने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देकर समानता, प्रेम और समरसता का सशक्त संदेश दिया। उनका सम्मान समाज को जातिवाद से ऊपर उठकर मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा बना।
महापुरुषों से लिया प्रेरणा
पूरा आयोजन गुरु घासीदास, बाबासाहेब अंबेडकर और महात्मा गांधी के विचारों से प्रेरित रहा। वक्ताओं ने कहा कि जब तक इन विचारों को केवल भाषणों तक सीमित रखा जाएगा, तब तक सामाजिक बदलाव अधूरा रहेगा; इन्हें व्यवहार में उतारना ही इस तरह के शिविरों का वास्तविक उद्देश्य है।
सम्मान एवं उत्साहवर्धन
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों को शाल,श्रीफल एवं प्रतीक चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देने वाले सभी प्रतिभागी बच्चों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस अवसर पर नगर अध्यक्ष शिवमंगल सिंह चौहान, भूतपूर्व नगर अध्यक्ष डेरहा डहरिया, उपाध्यक्ष देवीलाल बारवे, भाजपा युवा नेता प्रशांत यादव, पार्षद हरा बारवे, मुकेश कुर्रे, वरिष्ठ पारस रजक, प्राचार्य कमलनारायण गायकवाड़, भाऊदास मंगेश, सहायक आयुक्त सूरजदास मानिकपुरी, चोवाराम ध्रुव, माधवप्रसाद बांधे, हीरा रात्रे, लवकेश निराला, कुंजबिहारी भारद्वाज, रजनीकांत कोशले सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक, जनप्रतिनिधि, स्कूली बच्चे तथा आदिवासी विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।