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बड़ी साजिश: बलरामपुर में हनुमान मूर्ति खंडित, आस्था पर प्रहार से दहला इलाका, सुलग रहा आक्रोश!...

बलरामपुर : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने की एक बेहद शर्मनाक और दुस्साहसिक कोशिश की गई है। शंकरगढ़ के कोठली (पवईफाल) स्थित प्राचीन पवित्र हनुमान मंदिर में घुसकर असामाजिक तत्वों ने बजरंग बली की मूर्ति को लहूलुहान (खंडित) कर दिया। नए साल के जश्न के बीच हुई इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव और उबाल पैदा कर दिया है।

​साजिश या नफरत? आस्था को दी गई चुनौती :​यह केवल मूर्ति तोड़ना नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था को सरेआम चुनौती देना है। घटना की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब भक्त मंदिर पहुँचे, तो वहां का मंजर देखकर उनकी आंखें भर आईं।

​अपवित्रता की पराकाष्ठा : उपद्रवियों ने जानबूझकर मंदिर को निशाना बनाया ताकि सामाजिक शांति को भंग किया जा सके।

​टूटी मूर्ति, टूटा विश्वास : श्रद्धालुओं ने नम आंखों से खंडित मूर्ति के टुकड़ों को कपड़े से बांधकर किसी तरह मर्यादा बचाई, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है।

​बजरंग दल का अल्टीमेटम: "बख्शे नहीं जाएंगे गुनहगार" :​बजरंग दल के खंड संयोजक दयाशंकर यादव ने इस घटना पर तीखा हमला बोला है। थाने में दी गई अपनी शिकायत में उन्होंने साफ कहा है कि यह सुनियोजित तरीके से किया गया कृत्य है।

> ​"यह हमला हमारी धार्मिक भावनाओं पर सीधा प्रहार है। कुछ लोग क्षेत्र की शांति को आग लगाना चाहते हैं। अगर दोषियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं हुई, तो हिंदू समाज चुप नहीं बैठेगा।"

​शिकायत में कुछ धर्मांतरित तत्वों की संलिप्तता की आशंका भी जताई गई है, जिससे मामला और भी संवेदनशील हो गया है।

​पुलिस प्रशासन पर भारी दबाव :​घटना के बाद शंकरगढ़ पुलिस रक्षात्मक मुद्रा में है। प्रधान आरक्षक उर्मिला लहरी के नेतृत्व में जांच तो शुरू कर दी गई है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी न होना 

पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है। -
* ​बड़ा सवाल: क्या पुलिस इन "अदृश्य" उपद्रवियों को पकड़ पाएगी या मामला फाइलों में दबकर रह जाएगा?
* ​स्थानीय मांग: ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि अपराधियों को जल्द सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

सौहार्द की परीक्षा :​बलरामपुर का यह शांत इलाका आज नफरत की राजनीति की भेंट चढ़ने की कगार पर है। एक तरफ प्रशासन शांति की अपील कर रहा है, तो दूसरी तरफ धर्म प्रेमियों का आक्रोश उफान पर है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस आग को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है

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