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डुमरपाली की प्राथमिक शाला में शिक्षा व्यवस्था शर्मसार प्रधान पाठक नदारद, किराये के शिक्षकों के भरोसे बच्चों का भविष्य

देवराज दीपक - सारंगढ़।
सारंगढ़ जिले के डुमरपाली स्थित शासकीय प्राथमिक शाला में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर हुई है। जिस स्कूल से गांव के बच्चों का भविष्य संवरना चाहिए, वहीं प्रशासनिक अनदेखी और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के चलते पूरा शिक्षा तंत्र सवालों के घेरे में खड़ा हो गया है। स्कूल के प्रधान पाठक भारत माता खटकर की लगातार अनुपस्थिति से ग्रामीणों और पालकों में भारी रोष व्याप्त है।

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रधान पाठक महीनों तक स्कूल नहीं आते, केवल औपचारिकताओं में उपस्थिति दर्ज कर दी जाती है। इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि स्कूल का संचालन गांव की दो लड़कियों के भरोसे किया जा रहा है, जिन्हें प्रतिमाह पैसे देकर बच्चों को पढ़ाया जाता है। न तो वे किसी प्रकार से प्रशिक्षित हैं और न ही शिक्षा विभाग से अधिकृत। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बच्चों को कैसी शिक्षा दी जा रही होगी।

इस लापरवाही का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। बिना प्रशिक्षित शिक्षकों के बच्चों की बुनियादी शिक्षा कमजोर हो रही है और उनका भविष्य अंधकार की ओर धकेला जा रहा है। पालकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बेहतर भविष्य की उम्मीद में स्कूल भेजते हैं, लेकिन यहां शिक्षा के नाम पर केवल दिखावा हो रहा है। बच्चों के भविष्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।

इस पूरे मामले को लेकर गांव में गहरा आक्रोश है। कई बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वे शिक्षा विभाग के खिलाफ आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जब प्रधान पाठक नियमित रूप से स्कूल आते ही नहीं हैं, तो उन्हें शासन द्वारा पूरा वेतन किस आधार पर दिया जा रहा है। कहीं न कहीं यह पूरे मामले में विभागीय संरक्षण की ओर भी इशारा करता है। आखिर इतनी बड़ी अनियमितता अधिकारियों की जानकारी के बिना कैसे चल सकती है।

ग्रामीणों और पालकों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कर प्रधान पाठक पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। साथ ही स्कूल में नियमित और योग्य शिक्षक की शीघ्र नियुक्ति की भी जोरदार मांग उठाई है। अब तक शिक्षा विभाग की ओर से कोई ठोस बयान सामने नहीं आया है, जो विभाग की कार्यशैली पर और भी सवाल खड़े करता है।

डुमरपाली की यह स्थिति केवल एक स्कूल की कहानी नहीं, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र में व्याप्त लापरवाही और उदासीनता की भयावह तस्वीर है। यदि समय रहते इस पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो इसका खामियाजा सीधे-सीधे ग्रामीण क्षेत्र के मासूम बच्चे भुगतेंगे।

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