राज्य

राजयोग से तनावपूर्ण परिस्थितियों में मन को एकाग्र और शांत कर क्रोध पर नियंत्रण किया जा सकता है-भगवान भाई

चांपा।

क्रोध से कार्यक्षमता नष्ट हो जाती है, क्रोध की अवस्था में विचार बहुत ही तेज गति से चलने लगते हैं जिससे शारीरिक उर्जा व्यर्थ ही नष्ट होने लगती है। क्रोध के बाद थकावट का अनुभव होता है, क्रोधी व्यक्ति का स्वभाव सदा के लिए चिड़चिड़ा हो जाता है, क्रोध से तनाव उत्पन्न होता है जो कि फिर डिप्रेशन में बदल जाता है। राजयोग से क्रोध पर नियंत्रण किया जा सकता है। उक्त उदगार प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय माउंट आबू राजस्थान से आये हुए बी के भगवान भाई ने कहे, वे स्थानीय ब्रह्माकुमारीज राजयोग सेवाकेंद्र में  सकारात्मक चिंतन से क्रोध मुक्त जीवन विषय पर बोल रहे थे।
भगवान भाई ने राजयोग की विधि बताते हुए कहा कि स्वयं को आत्मा निश्चय कर चाँद, सूर्य, तारांगण से पार रहनेवाले परमशक्ति परमात्मा को याद करना, मन-बुद्धि द्वारा उसे देखना, उनके गुणों का गुणगान करना ही राजयोग है। राजयोग के द्वारा हम परमात्मा के मिलन का अनुभव कर सकते हैं। उन्होनें कहा की राजयोग के अभ्यास द्वारा ही हम काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, ईर्ष्या, घृणा, नफरत आदि मनोविकारों पर जीत प्राप्त कर जीवन को अनेक सद्गुणों  से ओतप्रोत भरपूर कर सकते हैं । राजयोग के द्वारा मन को दिशा निर्देशन मिलती है जिससे मन का भटकना समाप्त हो जाता है।
राजयोगी भगवान भाई ने अपने अनुभव के आधार से बताया की राजयोग के अभ्यास से विपरीत परिस्थिति में भी सकारात्मक चिंतन के द्वारा मन को एकाग्र किया जा सकता है। उन्होनें कहा कि वर्तमान की तनावपूर्ण परिस्थितियों में मन को एकाग्र और शांत रखने के लिए राजयोग संजीवनी बूटी की तरह काम आता है, राजयोग के अभ्यास द्वारा सहनशीलता, नम्रता, एकाग्रता, शांति, धैर्यता, अंतर्मुखता ऐसे अनेक सद्गुणों का जीवन में विकास कर सकते हैं, राजयोग द्वारा ही मन की शांति संभव है। उन्होनें बताया की राजयोग के अभ्यास से अतींद्रिय सुख की प्राप्ति होती है, जिन्होनें अतींद्रिय सुख की प्राप्ति कर ली उनको इस संसार के वस्तु, वैभव का सुख फीका लगने लगता है। राजयोग के द्वारा हम अपने इंद्रियों पर सयंम रखकर अपने मनोबल को बढा  सकते हैं, राजयोग द्वारा आंतरिक शक्तियाँ और सद्गुण को उभार कर जीवन में निखार ला सकते हैं। स्थानीय ब्रह्माकुमारी सेवाकेंद्र की प्रभारी बी के रचना बहन ने राजयोग को अपनी दिनचर्या का अंग बनाने की अपील किया उन्होंने कहा वर्तमान की विपरीत परिस्थितियों में राजयोग हमे तनाव मुक्त रखने में बहुत ही मददगार बनेगा। कार्यक्रम के अंत बी के भगवान भाई ने राजयोग का अभ्यास कराकर सभी को शांति का अनुभव कराया।

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