राज्य

सतनाम भवन में आयोजित सातवें संविधान दिवस महोत्सव में लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत पर सारगर्भित विमर्श हुआ

इमरान खोखर ब्यूरो चीफ मुंगेली 


मुंगेली । सतनाम भवन में आयोजित सातवें संविधान दिवस महोत्सव में लोकतंत्र, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शिक्षा और सांस्कृतिक विरासत पर सारगर्भित विमर्श हुआ। मुख्य वक्ता दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री एवं AICC अजा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेन्द्र पाल गौतम ने कहा कि आज लोकतंत्र में समता और समानता कमजोर होती जा रही है। अभिव्यक्ति की आज़ादी पर अनकहे प्रतिबंध लोकतंत्र की आत्मा को आहत कर रहे हैं। उन्होंने मशीनीकरण, एक विचारधारा के दबाव और पूंजीवाद के बढ़ते प्रभाव को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया। उनका कहना था कि शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने के प्रयास भविष्य की पीढ़ियों को पीछे धकेल देंगे और नागरिकों की चुप्पी इस संकट को और गहरा कर रही है।

लखनऊ केंद्रीय विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग के प्रो. राजेन्द्र कुमार वर्मा ने कहा कि ‘सनातन’ और ‘संघ’ जैसे शब्दों का राजनीतिकरण बढ़ा है, जबकि इनकी मूल अवधारणा बौद्ध चिंतन, संत परंपरा और समानता पर आधारित रही है। सांस्कृतिक विरासत पर किसी विचारधारा का कब्ज़ा समाज के लिए चिंताजनक संकेत है।

प्रमुख वक्ता डॉ. नरेश कुमार साहू ने मीडिया की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि संविधान दिवस जैसा महत्वपूर्ण आयोजन मुख्यधारा के मीडिया में जगह नहीं पा सका, जो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की गिरती विश्वसनीयता को उजागर करता है। उन्होंने चेताया कि यदि समाज सचेत नहीं हुआ, तो आने वाले वर्षों में संविधान की नींव कमजोर पड़ सकती है।

कार्यक्रम में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से शोधार्थी व विद्वान उपस्थित रहे। केरल विश्वविद्यालय के अग्निश देव ने उद्देशिका वाचन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संघ लोक सेवा आयोग में चयनित डॉ. विजेंद्र पाटले (MD मेडिसिन) ने आयोजन टीम का आभार जताया।

आयोजन के प्रमुख कृष्णकुमार नवरंग ने बताया कि यह कार्यक्रम पिछले एक दशक से युवा पीढ़ी को उच्च शिक्षा, शोध और उत्कृष्ट सेवाओं की ओर प्रेरित करता आ रहा है। बड़ी संख्या में अधिकारी, कर्मचारी, शिक्षाविद और सामाजिक प्रतिनिधि समारोह में शामिल हुए।

Leave Your Comment

Click to reload image