संभागीय नोडल पद पर लैब टेक्निशियन की नियुक्ति के खिलाफ चिकित्सकों का प्रतिनिधिमंडल कमिश्नर मिले सकारात्मक कार्रवाई का मिला आश्वासन
अंबिकापुर
संभागीय स्वास्थ्य तंत्र में चर्चाओं का विषय बने लैब टेक्निशियन राजेश गुप्ता को जिला मलेरिया अधिकारी एवं नोडल अधिकारी (नर्सिंग होम एक्ट, पीसीपीडीटी सहित) जैसे महत्वपूर्ण पदों का प्रभार दिए जाने के खिलाफ सरगुजा संभाग के चिकित्सकों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को कमिश्नर सरगुजा से मुलाकात कर विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा। प्रतिनिधिमंडल ने इसे पूरी तरह नियम विरुद्ध, वरिष्ठता व योग्यताओं की अनदेखी बताते हुए तत्काल कार्यवाही की मांग की।
चिकित्सकों द्वारा दिए गए आवेदन में प्रमुख रूप से उल्लेख किया गया है जिसमें जारी वरिष्ठता सूची (2018) के अनुसार राजेश गुप्ता 135वें क्रम पर हैं, जबकि उनसे ऊपर 25 से अधिक वरिष्ठ लैब टेक्निशियन उपलब्ध हैं। वर्ष 2013 में नियुक्त होने के बावजूद उन्हें 2022 में जिला मलेरिया अधिकारी जैसी वरिष्ठ जिम्मेदारी दे दी गई। शिकायत में यह भी कहा गया कि पूर्व में भी वे कई बार अनुपस्थित रहते हुए घर से वेतन लेते रहे और इस दौरान विभागीय कार्यक्रमों में वित्तीय अनियमितताएँ भी उजागर हुईं। कोरोना काल के दौरान भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से दूरी बनाए रखी, जबकि स्वास्थ्य विभाग का प्रत्येक कर्मचारी पूर्ण क्षमता से कार्यरत था। संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएँ रायपुर द्वारा 2023 में उन्हें मूल पद पर लौटने का आदेश दिया गया था, किंतु जिला स्तर पर आदेशों की अवहेलना कर वे आज भी अधिकारी पद पर कार्यरत हैं। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी सवाल उठाया कि जब एमबीबीएस /बीडीएस /बीएएमएस /बीएचएमएस डॉक्टर्स तक ग्रामीण स्तर पर उपलब्ध हैं, तब एमए योग्यता रखने वाले लैब टेक्निशियन को ही संभागीय नोडल क्यों बनाया गया?
चिकित्सकों ने बताया कि हाई कोर्ट आदेश क्रमांक सीजीएचसी
4992/2025 के अनुसार भी सक्षम अधिकारियों को स्थानांतरण अथवा पुनः पदस्थापना पर निर्णय लेने का अधिकार है, परंतु वास्तविक स्तर पर कोई ठोस निर्णय अभी तक सामने नहीं आया है।
कमिश्नर ने कहा पूर्व आदेश निरस्त कर सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी
मुलाक़ात के दौरान कमिश्नर सरगुजा ने संपूर्ण मामले का संज्ञान लेते हुए प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि
पूर्व में जारी आदेशों की समीक्षा कर उन्हें निरस्त करते हुए नियमसंगत और सकारात्मक कार्यवाही की जाएगी। चिकित्सक समुदाय ने कमिश्नर के इस आश्वासन का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि अब स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता व पारदर्शिता को प्राथमिकता देते हुए योग्य और अनुभवी अधिकारियों को ही संवेदनशील पदों का दायित्व सौंपा जाएगा। इस मुद्दे को लेकर संभागीय चिकित्सक लंबे समय से असंतुष्ट थे और अब उन्हें प्रशासनिक सुधार की उम्मीद जगी है।