भूमिहीन महिला नहीं बना पा रही प्रधानमंत्री आवास — भूमि न होने से केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना से वंचित लाभार्थी
गोविंद राम ब्यूरो चीफ
बलौदाबाजार।बिहान छत्तीसगढ़
बलौदाबाजार भाटापारा जिले के बलौदाबाजार विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत धाराशिव का एक संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ एक भूमिहीन महिला केजबाई यादव पति मनकराम यादव प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलने के बावजूद अपना मकान पूरा नहीं कर पा रही है।
मिली जानकारी के अनुसार, केजबाई यादव और उनका परिवार लगभग 35 वर्षों से जंगल के अंतिम छोर एवं बस्ती प्रारम्भ होती है आसपास मे अस्थाई रूप से एक मोहल्ले के रूप मे देखा जा सकता है और बस्ती से सटे कुछ वनभूमि का दैनिक दिनचर्या घूरवा के रूप उपयोग पहले गांव के लोग देहान एवं चारा-चरागन के रूप में करते आ रहे हैं। परिवार इतने लंबे समय से इस भूमि को अपनी निवास के रूप में उपयोग करता आ रहा है। इसी भरोसे के चलते उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के लिए स्वीकृत मकान का निर्माण इसी जगह प्रारंभ कर दिया और भवन छत लेवल तक बन भी चुका है।
लेकिन गांव के कुछ लोगों द्वारा शिकायत किए जाने पर वन विभाग ने उक्त भूमि को वनभूमि मानते हुए अवैध कब्जे की कार्यवाही शुरू कर दी। विभाग द्वारा निर्माणाधीन मकान को तोड़े जाने का प्रयास किए जाने के दौरान हुई अफरा-तफरी में ईट इकट्ठे करने के दौरान केजबाई यादव के पैर में ईंट गिर गई, जिससे उनका पैर फ्रैक्चर हो गया।
केजबाई यादव का कहना है —
> “मैं मानती हूँ कि जमीन वन विभाग की है, लेकिन मैं और मेरा परिवार 35 वर्षों से काबिज हैं। मैं शासन की किसी भी कार्रवाई में बाधा नहीं डाल रही। मैंने कलेक्टर, जनदर्शन, जिला पंचायत सीईओ, जनपद पंचायत सीईओ, वनमंडलाधिकारी, वन परिक्षेत्र अधिकारी तथा मंत्री टंक राम वर्मा जी सहित अन्य अधिकारियों को पट्टा एवं अनुमति के लिए आवेदन दिया है, लेकिन अब तक किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिली है।”
उन्होंने आगे कहा —
> “मेरी बस इतनी मांग है कि सरकार द्वारा बनाई गई ढाई डिसमिल भूमि एवं योजना के तहत मुझे जमीन पट्टा उपलब्ध कराई जाए, ताकि मैं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत प्राप्त अपने अधूरे घर को पूरा कर सकूं। मैं एक भूमिहीन महिला हूँ और शासन-प्रशासन से न्याय की उम्मीद रखती हूँ।”
इस मामले मे ग्रामीण के साथ साथ स्थानीय जनप्रतिनिधि का भरपूर समर्थन पीड़ित परिवार को प्राप्त है इसके अलावा ग्रामीणों का कहना है कि भूमिहीन लाभार्थियों के लिए भूमि उपलब्ध कराने की स्पष्ट नीति होने के बावजूद ऐसे मामलों में प्रशासनिक उदासीनता लोगों को योजनाओं से वंचित कर रही है।
अब देखना यह होगा कि शासन-प्रशासन इस गंभीर प्रकरण में क्या निर्णय लेता है और क्या केजबाई यादव को ढाई डिसमिल भूमि उपलब्ध कराकर उनके आवास के सपने को पूरा करने में मदद मिल पाती है या नहीं।