एन एच आर सी सी बी छत्तीसगढ़ टीम द्वारा पुलिस स्मृति दिवस पर श्रद्धापूर्वक नमन
जांजगीर चाम्पा
आज हम सुरक्षित है अपने घरों में आराम से चैन की नींद सोते हैं क्योंकि हमारे पुलिस जवान दिन रात लगे रहते हैं । दिन हो या रात हो धूप हो या बरसात या हो कोई त्यौहार उसके बावजूद अपने ड्यूटी में तैनात इस ध्यान में की कहीं कोई अपराधी या कोई वारदात न हो और अपने ड्यूटी में लगे चौकन्ने रहते है। इन वारदात में और भिड़त में कई पुलिस जवान शहीद हुए क्योंकि उन्हें सभी की सुरक्षा का ध्यान रहता है और इन्ही के वज़ह से हम अपने आप को सुरक्षित महसूस करते हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो छत्तीसगढ़ टीम द्वारा पुलिस स्मृति दिवस पर श्रद्धापूर्वक नमन अर्पित किया गया। एन एच आर सी सी बी छत्तीसगढ़ टीम के प्रदेश अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय संयुक्त सचिव डॉ जतिन्दरपाल सिंह ने कहा कि पुलिस स्मृति दिवस पर छत्तीसगढ़ टीम द्वारा पुलिस विभाग के कार्यालय में जाकर उन्हें एक स्मृति चिन्ह भेट करते आए हैं प्रयास किया जाता है कि हर विभाग में जाकर यह स्मृति चिन्ह भेट कर सके। इस वर्ष दीपावली के अवसर पर यह दिवस होने यह गतिविधि पूर्ण नहीं हो सकीं इस कारण समस्त टीम को इन दिनों में यह गतिविधि पूरी करने कहा गया और कहा गया प्रयास करे छत्तीसगढ़ के ज्यादा से ज्यादा पुलिस विभाग कार्यालय में जाकर यह सम्मान श्रद्धापूर्वक भेट करें । पुलिस स्मृति दिवस पर यह पंक्ति स्मृति चिन्ह पर अंकित है
मैं खाकी हूं......
दिन हूं रात हूं, सांड़ा वाली बाती हूं, मैं खाकी हूं।
आंधी में, तूफान में, होली में, रमजान में, देश के सम्मान में, अडिग कर्तव्यों की, अविचल परिपाटी हूं, मैं खाकी हूं...
तैयार हूं में हमेशा ही, तेज धूप और बारिश, हस के सह जाने को, सारे त्योहार सड़कों पे, भीड़ के साथ मनाने को, पत्थर और गोली भी खाने को, में बनी एक दूजी माटी हूं, में खाकी हूं-...
मुस्काती हूं, इठलाती हूं, वर्दी का गौरव पाती हूं, में खाकी हूं तम में प्रकाश हूं, कठिन वक्त में आस हूँ, हर वक्त मैं तुमहारे पास हूं, पानाओ, मैं दौड़ी चली आती है, में खाकी हूं...
विघ्न विकट सब सह कर भी, सुशोभित सज्जित भाती हूं। भूख और थकान की वो बात ही क्या, कभी आहत हूं, कभी बोझिल हूं,
और कभी तिरंगे में लिपटी, गेली सिसकती छाती हूं, मैं खाकी हूं शब्द कह पाया कुछ ही, आत्मकथा में बाकी है, में खाकी हूं...