विद्युत विभाग के कार्य में अधिकारियों कर्मचारियों से मिलकर ठेकेदार ने किए किए करोड़ों का घोटाला मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जैजैपुर विधायक बालेश्वर ने की है उच्चस्तरीय जांच की मांग
जांजगीर चांपा
उदय कंस्ट्रक्शन के संचालक ने विभिन्न जिलो के अधिकारी व कर्मचारियों से मिलकर आरडीएसएस योजना में फर्जीवाड़ा कर कई करोड़ का घोटाला किया है। कुछ साक्ष्यों को आधार मानकर जैजैपुर विधायक बालेश्वर साहू ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उचित कार्रवाई की मांग की है। जानकारी यह भी मिला था कि उनका यह आरोप भरा पत्र मुख्यमंत्री कार्यालय में प्राप्त नहीं होने की बात भी कही गई।
प्रदेश में भ्रष्टाचार की साख बढते ही जा रहा है। अधिकारी कर्मचारियो ने विभिन्न योजनाओं के राशियों में बंदरबांट कर अपने झोली भरने से बाज नही आ रहे है। बडी बात यह है कि सुशासन के इस सरकार में ये सब सम्भव कैसे हो रहा है। भ्रष्टाचार के इस मामले में मास्टरमाइंड बनकर प्रशासनिक अमले ने सिर्फ कलम चलाई है और अपने हिस्से बटोरे है। इस पूरे प्रक्रिया को भुनाने के लिए ठेकेदार ने अहम भूमिका निभाई है।
जिनपर किसी तरह की कार्यवाही नही हुआ है। अधिकारी कर्मचारी ने मिलकर इसमें ठेकेदार को भ्रष्टाचार के माध्यम से लाभ देने का काम किया है। ठेकेदार ने इन्हें भी बड़ा लाभ पहुंचाया है तभी तो मिलीभगत से यह सब सम्भव हो सका है। जैजैपुर विधायक श्री साहू ने विभिन्न जनप्रतिनिधियों व समाचार पत्रो से प्राप्त जानकारी को आधार मानकर मुख्यमंत्री को लिखे अपने पत्र के माध्यम से उचित कार्यवाही की मांग की है। उन्होंने बताया है
कि मेसर्स उदय कंस्ट्रक्शन के संचालक भुवनेश्वर साहू ने संबंधित विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों के साथ मिलकर आरडीएसएस पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना के अंतर्गत करोड़ों रुपये का गंभीर घोटाला किया है। इस योजना का उद्देश्य विद्युत विभाग के अधोसंरचना का विस्तार कर उपभोक्ताओं को बेहतर सेवा देना था, परंतु इसके क्रियान्वयन में भारी वित्तीय अनियमितताएँ की गईं।
प्राप्त दस्तावेजों और प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि जांजगीर-चांपा जिले में रू. 59.00 करोड़, सक्ति जिले में रू. 57.00 करोड़, कोरबा जिले में रू. 104.29 करोड़, आदि जिलों में कार्य की गुणवत्ता मानकों की अनदेखी कर ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुँचाया गया और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ। यह प्रकरण न केवल सरकारी तंत्र की साख को ठेस पहुँचाता है, बल्कि जनता के हितों के साथ भी विश्वासघात है। जिसकी उच्चस्तरीय जांच के लिए आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा या स्वतंत्र एजेंसी से कराने की उन्होंने मांग किया है।