राज्य

फर्जी सर्टिफिकेट कांड मामले ने पकड़ी तूल…! कलेक्टर साहेब…कृपया जांच कराएं…

फर्जी EWS मेडिकल कालेज में दाखिले का खेल… तहसील से गायब हुए अहम दस्तावेज क्लर्क पर गिरी गाज…!

बिलासपुर

-फर्जी EWS सर्टिफिकेट के सहारे मेडिकल कालेज में दाखिला लेने वाली तीन छात्राओं का मामला अब बड़े घोटाले का रूप लेता नज़र आ रहा है। तहसील कार्यालय से उन छात्राओं के मूल दस्तावेज़ रहस्यमय ढंग से गायब हो चुके हैं। यह कारनामा तहसील के भीतर बैठे किसी भीतरघाती हाथ का ही नतीजा माना जा रहा है।
क्लर्क पर गिरी गाज …!
जांच में खुलासा हुआ है कि तीनों छात्राओं के सर्टिफिकेट एक ही संदेही क्लर्क की आईडी से ऑनलाइन तैयार किए गए थे। तहसीलदार ने संदिग्ध क्लर्क को नोटिस थमाकर जवाब तलब किया है।


शक गहराने की वजह यह भी है कि तहसीलदार गरिमा सिंह ने साफ किया
इन प्रमाणपत्रों पर मेरे हस्ताक्षर ही फर्जी हैं मैंने इन्हें कभी साइन नहीं किया।
अब सवाल उठता है कि तहसीलदार के नकली हस्ताक्षर करने की हिम्मत आखिर किसने की…?
फर्जीवाड़े की जड़ें और हो रही गहरी..!
जांच में यह भी चर्चा है कि सिर्फ तीन नहीं, बल्कि चार से ज्यादा फर्जी EWS सर्टिफिकेट तहसील कार्यालय से बनाए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि यहां एक संगठित गिरोह लंबे समय से सक्रिय है, जो जाति, आय और EWS सर्टिफिकेट को बिक्री की दुकान की तरह इस्तेमाल कर रहा है।मेडिकल कालेजों में दाखिला
फर्जी दस्तावेज़ों के दम पर एक छात्रा ने अंबिकापुर और दूसरी ने कोरबा मेडिकल कालेज में दाखिला ले लिया। हैरानी की बात यह है कि जब गरिमा सिंह ने नियमों का हवाला देते हुए सर्टिफिकेट पर हस्ताक्षर से मना किया था, तो बाबू ने गुपचुप तरीके से फर्जी हस्ताक्षर करवा दिए और सर्टिफिकेट मेडिकल कालेज में जमा करवा दिया।

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