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अजब-गजब : यह पेड़ है या चमत्कार? बिना जड़ के 100 साल से खड़ा है… विज्ञान भी हैरान!

(कुलवन्त सिंह सलूजा की विशेष रिपोर्ट)


रायपुर /चाम्पा,सोचिए अगर कोई कहे कि एक विशाल पेड़ बिना जड़ों के भी सैकड़ों साल से खड़ा है, तो क्या आप मानेंगे? यह सुनने में अविश्वसनीय लगता है, लेकिन दरभंगा (बिहार) के पचड़ी गांव का रहस्यमयी वृक्ष इसी सच्चाई का जीता-जागता उदाहरण है। यह न केवल विज्ञान की समझ को चुनौती देता है, बल्कि इसकी दास्तान लोककथाओं और आस्था से भी गहराई से जुड़ी हुई है।
दातुन से जन्मा रहस्यमयी पेड़
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस पेड़ का जन्म किसी बीज से नहीं हुआ। कहा जाता है कि यहां कभी साहब राम बाबा नामक महान साधक निवास करते थे। एक दिन उन्होंने दातुन करने के बाद लकड़ी का एक छोटा टुकड़ा जमीन पर फेंका। वही साधारण-सा टुकड़ा आज सैकड़ों साल पुराना, विशाल और रहस्यमयी वृक्ष बन चुका है।
बिना जड़ के खड़ा है विशालकाय पेड़
इस वृक्ष की सबसे अनोखी बात है कि इसकी कोई जड़ दिखाई नहीं देती। ग्रामीण बताते हैं कि पेड़ का निचला हिस्सा ऐसे दिखाई देता है मानो कोई सिर जमीन से ऊपर निकल रहा हो और फिर वापस धरती में समा रहा हो। यही वजह है कि यह वृक्ष अब तक विज्ञान के लिए भी एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है।
मंदिर से जुड़ा है गहरा इतिहास
इस रहस्यमयी वृक्ष के ठीक पास एक प्राचीन मंदिर भी है, जिसका निर्माण दरभंगा महाराज ने करवाया था। इस मंदिर की पवित्रता और पेड़ का चमत्कार – दोनों मिलकर इस स्थान को आस्था और इतिहास का केंद्र बनाते हैं। यहां अब तक चार महंत अपनी सेवाएं दे चुके हैं और स्थानीय लोग मानते हैं कि इस स्थान पर आने से मन को अद्भुत शांति मिलती है।
आस्था और लोककथा का संगम
स्थानीय पुजारी बाबा महेश कांत ठाकुर का कहना है कि यह पेड़ साधक साहब राम बाबा की तपस्या का प्रतीक है। लोगों का विश्वास है कि यह सिर्फ एक वृक्ष नहीं, बल्कि साधक की दिव्य शक्ति का प्रमाण है। यही कारण है कि यहां दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन करने और आशीर्वाद पाने आते हैं।
विज्ञान बनाम आस्था
जहां आस्था रखने वाले लोग इसे साधक की कृपा मानते हैं, वहीं वैज्ञानिक सोचते हैं कि यह पेड़ प्रकृति की कोई अनोखी देन है।विज्ञान कहता है कि कोई भी पेड़ जड़ों के बिना खड़ा नहीं रह सकता, लेकिन इस पेड़ की संरचना और बिना जड़ों के खड़े होने का रहस्य आज तक स्पष्ट नहीं हो पाया है, जो विज्ञान की थ्योरी को चुनौती देता है। आखिर यह चमत्कार है या लोककथा? शायद यही सवाल इस पेड़ को और भी रहस्यमयी बना देता है।
एक सवाल, जो सबके मन में उठता है…
सैकड़ों साल से खड़ा यह वृक्ष आज भी अपनी जगह पर अडिग है। जब लोग इस पेड़ और मंदिर को देखकर लौटते हैं तो उनके मन में सिर्फ एक ही सवाल रह जाता है – क्या सचमुच कुछ रहस्य ऐसे होते हैं जिनका जवाब केवल आस्था और विश्वास में छिपा होता है?

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