राज्य

हर प्लांट में होना चाहिए डॉक्टर, परन्तु कंपाउंडर के भरोसे चल रहा है काम

रायगढ़,

औद्योगिक स्वास्थ्य व सुरक्षा विभाग की सांठगांठ, निरीक्षण रिपोर्ट में उद्योग को बचाने का करते हैं प्रयास, हादसे के तुरंत बाद नहीं मिल पाता इलाज
 कोयला आधारित प्लांटों में श्रमिकों की स्थिति को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट में सबसे ज्यादा रायगढ़ के संयंत्रों में लापरवाही उजागर हुई है। बीते पांच महीने में दर्जन भर से अधिक श्रमिकों की मौतों से यह बात साबित होती है कि श्रमिकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर विभाग बिल्कुल भी गंभीर नहीं है। कोई हादसा या श्रमिक का स्वास्थ्य खराब होने पर तत्काल चिकित्सा मिलनी चाहिए। लेकिन रायगढ़ में कंपाउंडर के भरोसे काम चल रहा है। रायगढ़ का औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग कभी श्रमिकों के हित में काम करना ही नहीं चाहता।

इतने हादसे होते हैं लेकिन रिपोर्ट ऐसी बनाई जाती है कि संबंधित कंपनी को फायदा हो। हाईकोर्ट ने आक्यूपेशनल हेल्थ मामले में सुनवाई करते हुए 68 पावर प्लांटों की स्थिति पर चिंता जताई है। हाईकोर्ट कमिश्नर नियुक्त कर अलग से जांच करवाई जा रही है। ऑक्यूपेशनल हेल्थ एंड सेफ्टी एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसमें कहा गया था कि देश के कोयला आधारित पावर प्लांटों में काम कर रहे श्रमिकों का स्वास्थ्य खराब है। इनका नियमित स्वास्थ्य परीक्षण नहीं करने से हालात और भी खराब हो रहे हैं। स्वास्थ्य और सुरक्षा के मापदंडों को पावर कंपनियां पूरा नहीं करती। रायगढ़ में स्टील और पावर प्लांट पूरी तरह से कोयले पर आधारित हैं।

ऐसे प्लांटों में काम करने वाले कर्मचारियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रयास नहीं हो रहे हैं। हादसे के बाद रिपोर्ट बनाकर सबमिट करने तक ही काम हो रहा है। न प्लांट में हालात ठीक हो रहे हैं और न ही श्रमिकों की मौतें कम हो रही हैं। नियम यह है कि संयंत्र के अंदर श्रमिकों की संख्या के अनुपात में डॉक्टरों की तैनाती होनी चाहिए। प्लांट के अंदर बनाई गई डिस्पेंसरी में केवल कंपाउंडर रखा गया है। डॉक्टरों से टाई अप किया गया है जो कभी कभार जाता है। इसीलिए हादसे के तुरंत बाद श्रमिक को चिकित्सा मिलने में देर होती है। जब तक उसे अस्पताल ले जाया जाता है, श्रमिक की मौत हो जाती है।

अब ओपी चौधरी ही करेंगे निराकरण
सालों से हो रहे बेतरतीब फ्लाईएश डिस्पोजल को व्यवस्थित करने में वित्त मंत्री ओ .पी .चौधरी की सख्ती काम आई है। अब रायगढ़ के संयंत्रों में हो रही श्रमिकों की मौतों को लेकर भी सख्ती जरूरी है। पिछले पांच महीने में 12 से भी ज्यादा श्रमिकों की मौत प्लांटों में हुई है। एमीकस क्यूरी की रिपोर्ट पर भी आईएचएसडी उप संचालक मनीष श्रीवास्तव ने गंभीरता और सतर्कता नहीं बढ़ाई। उस रिपोर्ट के आने के बाद संयंत्रों में मौतों का आंकड़ा बढ़ा हे जबकि रायगढ़ उनकी पदस्थापना को दस साल से अधिक हो चुके हैं।

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