क्षेत्र के स्कूलों में चल रही खटारा एवं जर्जर स्कूल बस, किया जा रहा है बच्चों की जान से खिलवाड़ - मोनू केसरी
खरसिया।
खरसिया विकासखण्ड क्षेत्र में संचालित निजी एवं शासकीय स्कूलों के अध्ययनरत छात्र छात्राओं को घर से स्कूल तक पहुंचाने एवं स्कूल से घर तक वापस लाने हेतु जो स्कूली बस एवं अन्य वाहनों चल रही है। उनमें से अधिकांश वाहनों की स्थिति काफी दयनीय है। इस संबंध में युवा नेता मोनू केसरी ने कहा है कि इन वाहनों में आना जाना करने वाले बच्चों के जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है इसका जिम्मेदार कौन है?
युवा नेता मोनू केसरी ने बताया कि खरसिया विकासखण्ड में सेंट जॉन इग्लिंश मिडयम स्कूल, चैतन्य स्कूल, अकेडिम स्कूल रजघटा, आलोक इंटरनेशनल रजघटा, विवेकानंद स्कूल मदनपुर, डी. ए.व्ही.मोनेट, शंकराचार्य स्कूल खरसिया, आत्मानंद स्कूल खरसिया एवं बंसल स्कूल ठुसेकेला संचालित है।
जिनमें पढ़ने वाले बच्चों को प्रतिदिन स्कूल बस या अन्य चारपहिया वाहनों से स्कूल आना जाना करना पड़ता हैं। स्कूल बस एवं अन्य वाहन संचालकों द्वारा इस सुविधा के एवज में अभिभावको से एक तयशुदा रकम प्रतिमाह लिया जाता है। वाहन संचालकों द्वारा स्कूली बच्चों के अभिभावकों से प्रतिमाह किराया राशि तो वसूला जाता है किंतु जितनी राशि वाहन किराया के रूप में वसूली जाती है उतनी सुविधाएं अधिकांश वाहन चालेको द्वारा स्कूली बच्चों को नहीं दिया जाता हैं। इसके अलावा खरसिया नगरीय क्षेत्र में संचालित होने वाले स्कूलो जैसे सेंट जॉन इग्लिंश मिडयम स्कूल, चैतन्य स्कूल, अकेडिम स्कूल रजघटा, आलोक इंटरनेशनल रजघटा, विवेकानंद स्कूल मदनपुर, शंकराचार्य स्कूल खरसिया, आत्मानंद स्कूल खरसिया में जो स्कूल बस या वाहन चल रहे है
उनमें से अधिकांश वाहनों की स्थिति काफी दयनीय है। शासन प्रशासन के नियम निदेर्शो का वाहन चालकों द्वारा किसी प्रकार पालन नहीं किया जाता है। छोटे वाहनों में तो बच्चों को क्षमता से अधिक भरकर ले जाया जाता है जिस कारण से स्कूली छात्र छात्राओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यदि भविष्य में किसी प्रकार की कोई घटना दुर्घटना घटित होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? इसलिये स्थानीय प्रशासन को चाहिए वो स्कूली बसों एवं अन्य वाहनों को फिटनेस, बीमा एवं वाहन चालकों का परीक्षण करें। अन्यथा हम आंदोलन करने को बाध्य होगें जिसकी समस्त जवाबदारी शासन प्रशासन की होगी।