राज्य

समाचार शीर्षक: भाटापारा राज्य कर विभाग में नियमविरुद्ध भर्ती का मामला उजागर, RTI से हुआ खुलासा, कार्यवाही की उठी मांग

गोविंद राम जिला ब्यूरो 
भाटापारा, बलौदाबाजार
राज्य कर सहायक आयुक्त वृत्त कार्यालय भाटापारा में चतुर्थ श्रेणी के 4 पदों पर हुई कथित गुपचुप और नियमविरुद्ध भर्ती का मामला सामने आया है। RTI (सूचना का अधिकार) से प्राप्त दस्तावेजों के माध्यम से यह खुलासा हुआ कि बिना किसी विज्ञापन, अनुमोदन अथवा निर्धारित प्रक्रिया के इन पदों पर नियुक्तियां की गईं।

जानकारी के अनुसार, कार्यालय में आदेश वाहक, फर्राश और चौकीदार जैसे चतुर्थ श्रेणी पदों पर क्रमशः हरदीप सिंह (11-11-2022), विक्रम भटनागर (02-01-2023), प्रियांशु सिंह ठाकुर (02-02-2023) और त्रियोगी (10-05-2023) की नियुक्ति अलग-अलग तिथियों में की गई। नियुक्तियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव और संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन स्पष्ट रूप से देखा गया है, जो रोजगार में समानता सुनिश्चित करते हैं।

सूत्रों का कहना है कि उक्त नियुक्तियां विभागीय अधिकारी मनोज चंदेल द्वारा निजी संपर्कों के आधार पर नियमों को दरकिनार करते हुए की गई हैं। नियुक्ति प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का सार्वजनिक विज्ञापन नहीं किया गया, न ही कोई मेरिट सूची जारी हुई, जिससे योग्य बेरोजगार युवाओं को अवसर नहीं मिल पाया।

मामले को लेकर आवेदक द्वारा जिला कलेक्टर बलौदाबाजार के जनदर्शन में 22 अक्टूबर 2024 को शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसका संदर्भ क्रमांक 2270124000849 है। इसके पश्चात 28 अक्टूबर को जांच आदेश जारी हुआ और 26 नवंबर 2024 को नोटशीट में कार्रवाई का उल्लेख भी किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

आवेदक का कहना है कि जब अन्य विभागों में भर्ती नियमों का पालन किया जा रहा है, तब भाटापारा जैसे व्यापारिक पृष्ठभूमि के शहर में ऐसे मनमाने तरीके से नियुक्तियां होना चिंताजनक है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें धमकाने और डराने की कोशिशें की जा रही हैं।

आवेदक ने कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं होती, तो क्षेत्रीय बेरोजगारों और आम जनता के सहयोग से रैली निकालकर ज्ञापन सौंपा जाएगा और इसी प्रकार के अन्य मामलों को भी आरटीआई के माध्यम से उजागर कर आगे कार्यवाही कराई जाएगी।

यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि जब सरकारी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमों का पालन नहीं होता, तो योग्य उम्मीदवारों का भविष्य अधर में लटक जाता है। यह प्रकरण एक मिसाल है कि कैसे भ्रष्टाचार और सांठगांठ के चलते सिस्टम में विश्वास डगमगाने लगता है।

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