कृषि विभाग में तीन गुना रेट पर खरीदी, करोड़ों की गड़बड़ी उजागर उप संचालक कृषि पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, विधायक ने विधानसभा में उठाया मामला।
जांजगीर-चांपा। कृषि विभाग जांजगीर-चांपा में बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आया है। जिला खनिज न्यास मद (DMF) से मिले करोड़ों रुपये के दुरुपयोग का मामला विधानसभा तक पहुंच गया है। उप संचालक कृषि द्वारा कथित रूप से तीन गुना दर पर की गई खरीद, किसानों के बीच वितरित की गई अनुपयोगी मशीनें और बिना जनप्रतिनिधियों की संस्तुति के हुए भुगतान ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विधायक ने उठाया ध्यानाकर्षण — तत्काल जांच की मांग
दिनांक 10 जुलाई 2025 को विधानसभा में नियम 138(1) के तहत क्षेत्रीय विधायक ने कृषि मंत्री का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर आकर्षित किया। विधायक ने स्पष्ट कहा कि—
“कृषि विभाग में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां की गई हैं, बाजार दर से तीन गुना अधिक दर पर मशीनें खरीदी गईं, DMF राशि का दुरुपयोग हुआ है और किसानों के हित को दरकिनार कर अफसरों ने कमीशनखोरी को प्राथमिकता दी है। इसकी निष्पक्ष जांच अनिवार्य है।”
बाजार से तीन गुना रेट पर हुई खरीदी, आंकड़े चौंकाने वाले:
उपकरण का नाम बाजार मूल्य (₹) खरीदी दर (₹)
मिनी राइस मिल ₹25,000 – ₹30,000 ₹1,20,000
पल्वराइज़र आटा चक्की ₹20,000 – ₹25,000 ₹1,20,000
ब्रश कटर ₹7,000 – ₹8,000 ₹36,000
बैटरी पावर स्प्रेयर ₹2,000 ₹5,600
वास्तविक जरूरत नहीं, फिर भी करोड़ों की खरीदी!
जिले में गेहूं और मसाले की खेती का कुल रकबा महज 5% है। इसके बावजूद 3-4 करोड़ रुपये की आटा चक्की और पल्वराइज़र मशीनें खरीदी गईं, जिनका उपयोग न के बराबर है। किसानों ने साफ कहा कि—
“हमें जिन मशीनों का वितरण किया गया, वे न खेती में काम आती हैं और न घर में। विभाग ने जो बांटा है, वह हमारे किसी काम का नहीं।”
कागजी वितरण के लिए टेंट-कुर्सी का लाखों का बिल!
विकासखंडों में उपकरण वितरण के नाम पर टेंट-कुर्सी और मंच सजाकर लाखों रुपये खर्च किए गए, जबकि ज़मीनी हकीकत में कई जगह वितरण केवल कागजों तक ही सीमित रहा।
वही अफसर, वही तरीका: पहले हटाए गए, अब फिर से पदस्थ गौरतलब है कि जिस उप संचालक ललित मोहन भगत पर यह आरोप हैं, उन्हें पूर्व में भी ऐसी गड़बड़ियों के कारण हटाया गया था। लेकिन अब फिर से उसी पद पर लौटकर भ्रष्टाचार को ‘वरदान’ की तरह बढ़ावा दे रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों और किसानों में गहरा रोष
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि— “उप संचालक ने ना तो हमसे कोई सुझाव लिया, ना मांग की,और ना ही उच्च अधिकारियों से अनुमति ली। यह सब कमीशनखोरी का खेल है।”
✅ अब आगे क्या?
▪️ विधानसभा में ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लग चुका है
▪️ जांच की सिफारिश की जा चुकी है
▪️ किसानों और जनप्रतिनिधियों की मांग — तुरंत निलंबन और उच्चस्तरीय जांच
इस पूरे मामले में यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो यह भ्रष्टाचार किसानों के अधिकारों पर एक और प्रहार होगा।