सेमरा आयुष्मान आरोग्य मंदिर में दोपहर 2,30 बजे लटका ताला, न नोटिस न सूचना! आखिर मरीजों की सुध कौन लेगा? गर्भवती महिला या आपातकालीन मरीज पहुंच जाए तो क्या होगा? नवागढ़ ब्लॉक में स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
जिला जांजगीर-चांपा, ब्लॉक नवागढ़।
आज दिनाँक 24 अक्तुबर दिन शनिवार दोपहर 2, 30 बजे को नवागढ़ ब्लॉक के अंतर्गत सेमरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के आयुष्मान आरोग्य मंदिर में ताला लटका होने की स्थिति सामने आई है। स्थानीय स्तर पर इस मामले को लेकर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि केंद्र बंद होने के दौरान न तो कोई नोटिस लगाया गया था और न ही मरीजों के लिए कोई सूचना प्रदर्शित की गई थी।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई गर्भवती महिला जांच या उपचार के लिए पहुंच जाए, अथवा अचानक किसी मरीज की तबीयत बिगड़ जाए, तो उसे समय पर स्वास्थ्य सुविधा कैसे मिलेगी? ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्र लोगों के लिए प्राथमिक उपचार का महत्वपूर्ण सहारा होते हैं। ऐसे में केंद्र बंद मिलने से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
आखिर जिम्मेदार कौन?
यदि स्वास्थ्य केंद्र निर्धारित समय में बंद था और इसकी पूर्व सूचना भी नहीं दी गई थी, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी है कि केंद्र के संचालन, कर्मचारियों की उपस्थिति और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाए।
अब सवाल स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से है:
- आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद होने का कारण क्या है?
- क्या केंद्र बंद रखने की कोई आधिकारिक अनुमति थी?
- यदि केंद्र बंद था, तो मरीजों को सूचना देने की व्यवस्था क्यों नहीं थी?
- गर्भवती महिलाओं और आपातकालीन मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था क्या है?
- क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा केंद्र का निरीक्षण किया जाएगा?
स्वास्थ्य विभाग से जांच की मांग
इस मामले में संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को वास्तविक स्थिति की जांच करानी चाहिए। यदि जांच में ड्यूटी में लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो नियमानुसार जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि आम जनता को समय पर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें और भविष्य में मरीजों को बंद दरवाजे से वापस न लौटना पड़े।
जनता का सवाल साफ है—जब जरूरत के समय स्वास्थ्य केंद्र ही बंद मिलेगा, तो ग्रामीण आखिर इलाज के लिए कहां जाए