राजधानी
डॉ. रूपेन्द्र कवि हुये छग राजभवन में डिप्टी सेक्रेटरी पद पर प्रतिनियुक्त
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर -
छत्तीसगढ़ के प्रख्यात मानव विज्ञानी , साहित्यकार एवं जनजातीय शोधकर्ता डॉ. रूपेन्द्र कवि को छत्तीसगढ़ राज्यपाल सचिवालय में डिप्टी सेक्रेटरी (उप सचिव) पद पर प्रतिनियुक्त किया गया है। वे वर्तमान में आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (क्षेत्रीय इकाई) , बिलासपुर में उपसंचालक पद पर कार्यरत थे।
डॉ. कवि को यह दायित्व उनके व्यापक प्रशासनिक अनुभव , अनुसंधान क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान तथा आदिवासी समाज के लिये सतत कार्य के आधार पर प्रदान किया गया है। गौरतलब है कि डॉ. रूपेन्द्र कवि मूलतः बस्तर संभाग के जगदलपुर से हैं और वे जनजातीय समाज के सांस्कृतिक , सामाजिक और आर्थिक पहलुओं पर गहन कार्य कर चुके हैं। एक मानव वैज्ञानिक होने के साथ-साथ वे एक सजग साहित्यकार भी हैं
, जिन्होंने कविता , निबंध और सामाजिक विश्लेषण के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। वे प्रदेश की कई शोध परियोजनाओं का नेतृत्व कर चुके हैं और विभिन्न राष्ट्रीय व राज्यस्तरीय संगोष्ठियों में बस्तर और छत्तीसगढ़ के आदिवासी जीवन पर आधारित व्याख्यान दे चुके हैं। उनका लेखन समाज के वंचित वर्गों की आवाज को स्वर देने वाला रहा है।
उनकी इस नियुक्ति पर शोध संस्थान के अधिकारियों , कर्मियों , साहित्यिक और शैक्षणिक जगत से जुड़े व्यक्तियों सहित उनके मित्रों व परिजनों ने हार्दिक शुभकामनायें दी हैं। सभी ने आशा जताई है कि डॉ. कवि अपनी संवेदनशीलता , दूरदर्शिता और सेवा भाव के साथ इस नई जिम्मेदारी को भी सफलता पूर्वक निभायेंगे। डॉ. कवि की यह उपलब्धि राज्य प्रशासन और सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की प्रतिभा को नई पहचान दिलाने वाली है।
रायपुर में इंजीनियर के ऊपर फेंका जिंदा सांप:
राजधानी रायपुर में कुछ बदमाश लड़कों ने इंजीनियर के ऊपर जिंदा सांप फेंक दिया। जब उसने ऐसा करने से मना किया, तब लड़कों ने इंजीनियर की बेल्ट और लात घुसों से पिटाई कर दी। घटना गुरुवार (31 जुलाई ) की है। मामला विधानसभा थाना क्षेत्र का है।
पुलिस के मुताबिक, पीड़ित रात 8 बजे अपनी गाड़ी से घर जा रहा था। रिंग रोड टेकारी मोड़ के पास रास्ते से एक सांप गुजर रहा था। वहां मौजूद युवकों ने सांप को उठाकर कुलदीप के ऊपर फेंक दिया। मना करने पर दोनों पक्षों में बहस हो गई जिसके बाद बदमाशों ने उसे खूब मारा। कुलदीप यदु ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई जिसमें बताया कि वह सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई किया है। एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। वह अपनी गाड़ी से घर जा रहा था।
तभी वहां मौजूद युवकों ने सड़क किनारे से सांप को उठाकर उसके ऊपर फेंक दिया। जिससे वह डर गया। कुलदीप ने लड़कों को ऐसा करने से मना किया। जिससे बहस बाजी हो गई। कुछ दूर आगे बढ़ने के बाद बाइक में तीन युवक सवार होकर आ गए। उन्होंने कुलदीप को लात मुक्का और बेल्ट से मारना शुरू कर दिया। मारपीट में कुलदीप के गले में चोटें आई है। उसने थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है।
दंडकारण्य में राम - डॉ शाहिद अली
प्राचीन भारत में दंडकारण्य वनों से आच्छादित एक वृहद भौगोलिक स्थिति का क्षेत्र रहा है। दण्डक और अरण्य दो शब्दों से मिलकर यह दण्डक वन कहलाता है यानी दंड देने वाला जंगल। लोक चर्चा में कहा जाता है कि घने जंगलों और खूंखार जानवरों से घिरा यह क्षेत्र जीवन के कठोर तप , संघर्ष और यातना का स्थल रहा है। विंध्याचल से लेकर गोदावरी तक दंडकारण्य के सुप्रसिद्ध वनों का फैला हुआ परिदृश्य हमेशा से आकर्षण एवं कौतूहल का विषय रहा है। इसका ऐतिहासिक, पौराणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व खोज एवं अध्ययन की दृष्टि से विश्व का ध्यान अपनी ओर खींचता रहा है। वनवास के समय भगवान श्री रामचन्द्र ने यहां एक लंबा समय गुजारा है।
दंडकारण्य पूर्वी मध्य भारत का भौगोलिक क्षेत्र है। लगभग 92,300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफ़ल में फैले इसके पश्चिम में अबूझमाड़ की पहाड़ियां तथा पूर्व में इसकी सीमा पर पूर्वी घाट का विस्तार है। दंडकारण्य के विशाल अरण्य में छत्तीसगढ़, तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे पांच बड़े राज्यों का परिक्षेत्र शामिल है। सदियों से दंडकारण्य रहस्यों की अबूझ पहेली भी रहा है इसलिए यहां अबूझमाड़ भी है। लंबे समय से अनेकों इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और मानवविज्ञानियों का अध्ययन दंडकारण्य को समझने में बदस्तूर जारी है। एक किंवदंती के अनुसार दंडकारण्य क्षेत्र को मांडव्य नामक ऋषि ने श्राप दिया था, जिन्हें एक ऐसे अपराध के लिए अनुचित दंड दिया गया था जो उन्होंने किया ही नहीं था। इस श्राप के कारण यह भूमि राक्षसों और दुष्ट आत्माओं से शापित हो गई, जिससे यह मनुष्यों के लिए एक दुर्गम स्थान बन गया। इसलिए यह स्थान और भी रहस्यमय माना जाता है।
पुरातात्विक अध्ययनों से पता चलता है कि दंडकारण्य प्रागैतिहासिक काल से ही बसा हुआ है। नवपाषाण काल के पत्थर के औजार, मिट्टी के बर्तन और अन्य कलाकृतियां आज भी इसके गवाह हैं। घने जंगलों में दंडकारण्य के विशाल क्षेत्र को समझना बहुत कठिन है। दंडकारण्य की एक पहचान उसकी समृद्ध जैव विविधता है। इस क्षेत्र के जंगल विविध प्रकार की वनस्पतियों और जीवों का घर है। बहुमूल्य औषधीय पौधों का उपयोग आदिवासी समुदाय सदियों से करते आ रहे हैं। आदिवासियों का जंगलों से गहरा नाता है और इनकी पारंपरिक जीवन शैली प्राकृतिक संसाधनों से गहराई से जुड़ी है। आदिवासी हस्तशिल्प और संस्कृति की अद्भुत मिसाल यहां देखी जा सकती है। ऐसी विविधताओं से समृद्ध दंडकारण्य का आध्यात्मिक महत्व तब और बढ़ जाता है जब राम वन गमन पथ की चर्चा होती है। छत्तीसगढ़ का यह वैभवशाली इतिहास है। रामायण के अनुसार दंडकारण्य में श्रीराम के लोकोद्धार संबंधी कार्यों की नींव पड़ी। रामायण में दंडकारण्य का उल्लेख है। महाकाव्य रामायण में दंडकारण्य का उल्लेख उस स्थान के रूप में मिलता है जहां भगवान श्रीराम ने अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ चौदह साल का वनवास बिताया। यहां कई ऐसे स्थल हैं जो रामायण की घटनाओं से जुड़े हुए हैं और धार्मिक आस्था के केंद्र हैं। दंडकारण्य में श्रीराम का वनवास कई मायनों में महत्वपूर्ण था जब उन्होंने ऋषि मुनियों की रक्षा के लिए की राक्षसों का वध किया जिनमें खर और दूषण जैसे राक्षस मारे गए थे। उन्होंने इस क्षेत्र को राक्षसों से मुक्त कराकर एक सुरक्षित स्थान बनाया। दंडकारण्य में एक महत्वपूर्ण स्थान है पंचवटी, जहां भगवान राम ने अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ निवास किया था। पंचवटी में ही रावण ने सीता का हरण किया था जो रामायण का एक महत्वपूर्ण प्रसंग है। दंडकारण्य में भगवान राम की उपस्थिति का धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। हिंदू धर्म के लिए यह क्षेत्र आस्था और दर्शन का प्रमुख स्थान है। ऐसे अनेक स्थल दंडकारण्य में हैं जो भगवान श्रीराम की कहानी से जुड़े हुए हैं, इसलिए यह क्षेत्र धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।
दंडकारण्य में भगवान राम की उपस्थिति रामायण के पन्नों में दर्ज है। भगवान राम ने अपने वनवास के दौरान दंडकारण्य में कई महत्वपूर्ण घटनाओं का सामना किया इसलिए यह क्षेत्र हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए एक पवित्र तीर्थ स्थल है।
दंडकारण्य में आदिवासी संस्कृति एक समृद्ध और विविध धरोहर है, जो इस क्षेत्र की पहचान को दर्शाती है। दंडकारण्य में कई आदिवासी समुदाय निवास करते हैं, जिनकी अपनी अनोखी संस्कृति, परंपराएं, और जीवनशैली है। इन समुदायों में गोंड समुदाय दंडकारण्य में एक प्रमुख आदिवासी समुदाय है, जो अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है। गोंड समुदाय के लोग अपनी कला, संगीत और नृत्य के लिए प्रसिद्ध हैं। बैगा समुदाय भी दंडकारण्य में निवास करता है और अपनी अनोखी संस्कृति और जीवनशैली के लिए जाना जाता है। बैगा समुदाय के लोग प्रकृति की पूजा करते हैं और अपनी परंपराओं को बहुत महत्व देते हैं। माड़िया समुदाय दंडकारण्य में निवास करने वाला एक अन्य महत्वपूर्ण आदिवासी समुदाय है। माड़िया समुदाय के लोग अपनी कला और शिल्प के लिए प्रसिद्ध हैं और अपनी परंपराओं को सहेजकर रखते हैं।
दंडकारण्य के आदिवासी समुदाय अपनी समृद्ध लोक साहित्य एवं सांस्कृतिक परंपराओं के लिए जाने जाते हैं, जिनमें राम की पवित्र स्मृतियों का उल्लेख मिलता है। आदिवासी समुदायों में नृत्य और संगीत का बहुत महत्व है। ये समुदाय अपने त्योहारों और समारोहों में पारंपरिक नृत्य और संगीत का प्रदर्शन करते हैं। विभिन्न त्योहारों और समारोहों का आयोजन करते हैं, जो उनकी संस्कृति और परंपराओं का हिस्सा हैं। ये त्योहार प्रकृति की पूजा और समुदाय के बंधन को मजबूत करने के लिए मनाए जाते है।आदिवासी समुदाय अपनी कला और शिल्प के लिए प्रसिद्ध हैं। ये समुदाय विभिन्न प्रकार की हस्तशिल्प वस्तुओं का निर्माण करते हैं,
जो उनकी संस्कृति और परंपराओं को दर्शाती है जिनमें राम के दर्शन मिलते हैं। दंडकारण्य के आदिवासी समुदाय अपनी पारंपरिक जीवनशैली के लिए जाते हैं।
दंडकारण्य के सबसे बड़े भू-भाग वाले बस्तर में ऐसे कई उदाहरण हैं जहां राम और लक्ष्मण आदिवासी समुदायों के जीवन व्यवहार में उपस्थित हैं। तभी लाला जगदलपुरी लिखते हैं कि बस्तर अंचल की आदिम प्रजातियों के एक पक्ष में श्रीराम के स्मृति चिन्ह हैं। हल्बी भतरी लोक साहित्य में कहीं कहीं प्रसंगवश श्रीराम संदर्भित हैं, जिसमें कहते हैं, करेया डेरी / करेया पाटी / राम - लैखन र घर / राम लैखन पकाई देला, करेया छालीरफर । ये एक पहेली है।
पहेली में यह चित्र उभरता है कि आसमान पर काले काले घटाटोप बादल छाए हुए हैं, आंधी पानी का जोर है, ओले बरस रहे हैं। ऐसा कहते हैं कि इन ओलों को ग्रामवासी राम लैखन द्वारा गिराए गए प्रसाद समझकर ग्रहण करते और झेलते भी हैं। राम लैखन ने काले-काले छिलकों वाले फूलों के छिलके उतार उतार कर उनके सफेद खाद्यांश फैंके हैं। इतने दयालु हैं वे। भतरी लोक साहित्य के इस बिंदु में राम के प्रति अगाध श्रद्धा का पहलू अद्भुत है। हल्बी भतरी लोक साहित्य में ऐसे अनेकों प्रसंग मिल सकते हैं जिनमें राम चर्चा मौजूद है।
दंडकारण्य का दर्शन और उसका सौन्दर्य बोध बिना राम चर्चा के अधूरा है। कहा जाए तो दंडकारण्य की भूमि, वन और आदिवासी का सम्मिलन ही वास्तव में श्रीराम की उपस्थिति और उसका दर्शन है । दंडकारण्य के आदिवासी समुदायों की संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण एवं संवर्धन इस क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखने के लिए जरूरी है।
( लेखक मीडिया शिक्षाविद् हैं।)
जंगल के मजदूरों को उठाकर मुर्गी फार्म मे काम करवाया, भुगतान भी नहीं किया वनरक्षक मनबोधन टंडन की भ्रष्टाचार की परतें खुल रही
बलौदाबाजार:-
बलौदाबाजार वन परिक्षेत्र के अंतर्गत धाराशिव अस्थाई रोपणी मे तैनात बीट गार्ड मनबोधन टंडन पर एक ऐसा सनसनीखेज आरोप सामने आया है जो न केवल शासकीय सेवा के मूल सिद्धांतों को ठेंगा दिखाता है, बल्कि मानवाधिकारों के खुलेआम उल्लंघन का उदाहरण भी बन चुका है। आरोप है कि मनबोधन टंडन ने न केवल नरेगा मजदूरों के नाम पर फर्जी मस्टररोल तैयार कर सरकारी राशि का गबन किया, बल्कि ग्रामीण मजदूरों को जबरदस्ती एक निजी मुर्गी फार्म में कार्य करवाने के लिए विवश किया, और इसके एवज में उन्हें कोई मजदूरी तक नहीं दी गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दर्जनों ग्रामीणों को जो पहले जंगल में श्रम करके जीविकोपार्जन कर रहे थे, उन्हें बीट गार्ड टंडन द्वारा यह कहकर बुलाया गया कि उन्हें नरेगा के तहत जंगल कार्य में लगाया जाएगा। लेकिन वास्तविकता में उन्हें भेजा अपने करीबी अतिक्रमणकारी मित्र के दूसरे गाँव स्थित मुर्गी फार्म में, जहाँ उनसे मुर्गियों की सफाई, दाना डालना, फार्म की साफ-सफाई जैसे कार्य करवाए गए। कई ग्रामीणों ने बताया कि वे रोज़ सुबह से देर शाम तक फार्म में कार्य करते थे, लेकिन उन्हें एक रुपये तक का भुगतान नहीं मिला। उक्त कृत्य न केवल घिनौना है बल्कि पूरी तरह से अनुशासनहीनता का घोर उदाहरण है।
धाराशिव वन क्षेत्र में भ्रष्टाचार की जड़ें गहराई तक
इस तरह धाराशिव वन क्षेत्र में तैनात बीट गार्ड मनबोधन टंडन दिनों-दिन आरोपों के घेरे में घिरते जा रहे हैं। भ्रष्टाचार, पक्षपात और सरकारी पद के दुरुपयोग को लेकर ग्रामीणों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि मनबोधन टंडन द्वारा वन भूमि का संरक्षण करने के बजाय उसे निजी हितों और कमीशनखोरी का अड्डा बना दिया गया है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, जब निर्धन और बेघर परिवारों ने वन भूमि में अस्थायी रूप से झोपड़ी डालकर सिर छुपाने की कोशिश की, तो वन विभाग ने तुरंत उन्हें खदेड़ दिया। यही नहीं, सरकार द्वारा स्थापित किए जा रहे धान उपार्जन केंद्र को भी वन विभाग की अनुमति न मिलने से अधर में लटका दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, बीट गार्ड मनबोधन टंडन द्वारा अपने निजी संबंधों के लोगों को मोटी रकम लेकर पक्के मकान निर्माण की अनुमति दी जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि ये लोग पहले से ही गाँव में बड़े-बड़े मकानों के मालिक हैं और संपन्न वर्ग से आते हैं।
फर्जी मस्टररोल और नरेगा घोटाले का भी आरोप
मनबोधन टंडन के खिलाफ एक और बड़ा आरोप नरेगा योजना के तहत फर्जीवाड़े का भी है। ग्रामीणों ने खुलासा किया है कि जंगल चौकीदार संतोष यदु के पूरे परिवार के नाम पर फर्जी मस्टररोल भरकर हजारों रुपये का गबन किया गया, जबकि वे कभी जंगल कार्य में शामिल ही नहीं हुए। इसके उलट, जो असल में जंगलों की सुरक्षा व रखरखाव में दिन-रात मेहनत कर रहे थे, उन्हें आज तक मजदूरी की राशि नहीं मिली।
दर्जनों मजदूरों को नरेगा के नाम पर हेरफेर कर अपने करीबी अतिक्रमणकारी के मुर्गी फार्म में जबरिया कार्य करवाया जाना , अपने चौकीदार के परिवारवालों के नाम मस्टररोल जारी करना, अपने दोस्ती यारी मे मित्रगण को वनभूमि मे अतिक्रमण करने देना यह पूरी घटना शासकीय कर्मचारी के आचरण नियमों का घोर उल्लंघन है और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का ज्वलंत उदाहरण भी। वनमंत्री को किये गए शिकायत मे ग्रामीणों ने कहा है कि यदि निष्पक्ष जाँच कार्यवाही नहीं होती तों व्यपाक जनआंदोलन किया जावेगा।
नये सवेरा वृद्ध आश्रम का होगा शीघ्र शुभारंभ बेसहारा बुजुर्गो के लिये उम्मीद की नई किरण
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
भाटापारा -
आज सारे विश्व के साथ हमारे देश में भी बुजुर्गों की स्थिति बड़ी ही दयनीय व मार्मिक है। इनमें से कुछ बुजुर्ग भरे पूरे परिवार के रहते हुये भी बेहद प्रताड़ित व उपेक्षित जीवन जीने को मजबूर हैं। जिसके पीछे अहम कारण उनके बच्चे व बेटे बहू या अन्य परिवार के सदस्यों का नौकरी या अन्य कारणों से घर परिवार से दूर अन्यत्र स्थानों पर कार्यरत होना होता है। वहीं कुछ बुजुर्ग लोगों को कतिपय कारणों से अपने बच्चों द्वारा उन्हें उपेक्षित करना कारण माना जाता है। इनमें से कुछ बुजुर्ग अनाथ भी होते है , ऐसे कई कारणों के चलते उन्हें अभिशप्त जीवन बिताना पड़ता है। इन्हीं सभी कारणों के मद्देनजर रखते हुये हमारे कई सामाजिक संस्थाओं द्वारा वृद्धाश्रम संचालित किये जाते हैं , जहां अपने परिवार से उपेक्षित एवं प्रताड़ित वृद्धों को आश्रय दिया जाता हैं। इन्हीं सब कारणों को देखते हुये भाटापारा नगर के समीप गांव मोपका के मालगुजार रामनाथ वर्मा की पौत्रवधू डॉ. श्वेता वर्मा द्वारा जो स्वयं डॉक्टर (जिसे भगवान का दर्ज दिया जाता है )
के रूप मे कार्यरत हैं। इन्होंने इस मानव सेवा के महती कार्ययोजना को क्रियान्वित करने का बीड़ा उठाकर स्थानीय रजिस्ट्री (टेजरी) ऑफिस के पीछे , हनुमान मंदिर के पास वृद्धाश्रम का निर्माण करवाया है। जहां गरीब , बेसहारा , अनाथ व कतिपय कारणों से घर से दूर रहने वाले बुजुर्ग को एक अच्छे वातावरण में आश्रय मिलेगा। जहां उसके खान - पान और स्वास्थ्य के साथ - साथ मनोरंजन , खेलकूद , लाइब्रेरी , सभी दैनंदिनी जरूरतों का भी ध्यान रखा जायेगा। इस वृद्धाश्रम की संचालिका डॉ. श्वेता वर्मा ने चर्चा के दौरान अरविन्द तिवारी को बताया कि सीआईएसएस फाउंडेंशन के बैनर तले संचालित नया सवेरा वृद्ध आश्रम का शुभारंभ संभवतः पंद्रह अगस्त को हो सकता है। गौरतलब है कि ग्रामीण बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने के उद्देश्य से रामनाथ वर्मा ने अपने गृह ग्राम मोपका में अपनी दस एकड़ जमीन शासन को दान में देकर यहां एक पीजी. शासकीय महाविद्यालय भी संचालित की जा रही है , जहां ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। वहीं उनकी पौत्रवधु डॉ. श्वेता वर्मा द्वारा भाटापारा नगर में स्वयं का फिजियोथेरेपी का संचालन किया जा रहा है , जहां पर अनेकों मरीज अपना स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। इस पूरे परिवार द्वारा जन सेवा के लिये जो कार्य किये जा रहे हैं , उनकी इस क्षेत्र की जनता भूरी - भरी प्रशंसा कर रही है।
सूदखोर तोमर बंधुओ को हाईकोर्ट से राहत:कोर्ट ने रायपुर निगम के एक्शन में लगाई रोक,
रायपुर
सूदखोर तोमर बंधुओ को बिलासपुर हाई कोर्ट से राहत मिली है। कोर्ट ने रायपुर नगर निगम को वीरेंद्र तोमर के घर पर तोड़फोड़ पर पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने तेलिबांधा पुलिस को भी आदेश दिया है कि रेड कार्यवाई में जब्त हुए घर से जुड़े हुए डॉक्यूमेंट की कॉपी को लौटाए। जिससे कि घर के कागजात नगर निगम में दिखाया जा सके। मामले में बचाव पक्ष की ओर से पूर्व महाधिवक्ता सतीश चंद वर्मा और वरिष्ठ अधिवक्ता सजल गुप्ता ने पैरवी की थी।
इस मामले की सुनवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रविंद्र अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई। दरअसल रायपुर नगर निगम ने वीरेंद्र तोमर के घर में स्थित कार्यालय को अवैध घोषित किया था। फिर इसमें बुलडोजर चलाकार तोड़ दिया था। बचाव पक्ष के वकील का कहना है कि निगम ने घर तोड़ने के लिए भी नोटिस दिया था। जिस पर हाई कोर्ट ने अस्थाई रोक लगा दिया हैं।
गौमाता की दुर्दशा पर सियासत भारी: बलौदाबाजार में गौवंश की मौत, पत्रकारों पर दबाव
बलौदाबाजार :-
प्रदेश में गौवंश की सेवा के नाम पर राजनीति तो ज़ोर-शोर से हो रही है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही बयां कर रही है। बलौदाबाजार जिले के ग्राम पंचायत रिसदा में गौवंश की दुर्दशा ने सरकार की कथनी और करनी में फर्क को उजागर कर दिया है। स्थानीय पत्रकारों द्वारा गांव में मरते गौवंश की तस्वीर और हालात जब उजागर किए गए, तो एक बार फिर सवाल उठा — गौमाता की असली चिंता किसे है? ज्ञात हो कि
रिसदा गांव में बीते दिनों गौवंश की मौत केवल इसलिए हो गई क्योंकि उन्हें न तो समय पर चारा मिला, न ही पानी और न ही कोई चिकित्सकीय देखभाल। स्थानीय लोगों के अनुसार फसल सुरक्षा के मद्देनज़र मवेशियों को एक जगह एकत्रित कर रखा गया है किन्तु उचित प्रबंधन के अभाव एवं चारा पानी की अव्यवस्था के कारण मवेशी की मौत हुई है। इस मुद्दे को जब पत्रकारों ने मीडिया में उजागर किया, तो बजाय समस्या के समाधान के, पत्रकारों पर ही दबाव और धमकी का सिलसिला शुरू हो गया। बात यहाँ तक पहुंच गयी की बलौदाबाजार सरपंच संघ ने इस पूरे मामले में जिला कलेक्टर को आवेदन सौंपते हुए पत्रकारों के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाए हैं। सरपंचों ने यह कहकर पल्ला झाड़ा कि गौवंश की जिम्मेदारी केवल पंचायतों की नहीं हो सकती, और मीडिया को ऐसी खबरें नहीं चलानी चाहिए जिससे पंचायतों की छवि धूमिल हो। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि राज्य सरकार के पास गौवंश संरक्षण की कोई ठोस और प्रभावी नीति नहीं है, और जब कोई इसकी वास्तविकता को उजागर करता है तो उसे दबाने का प्रयास किया जाता है।
गौमाता की दुर्दशा पर राजनीति, ज़मीनी हकीकत कहीं और
राजनीति में 'गौसेवा' को लेकर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर गौशालाएं बदहाल हैं, बजट नदारद है और प्रशासन जिम्मेदारी से भाग रहा है। सड़क दुर्घटनाओं में मरते मवेशी, खुले में घूमती गायें, और बीमार हालत में तड़पते बेजुबान — यही है आज की गौसेवा की असल तस्वीर।
जब पत्रकार सच्चाई को सामने लाते हैं, तब उन्हें धमकाना, उन पर राजनीतिक दबाव बनाना, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला है। यदि सरकार और प्रशासन यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि गौवंश की जिम्मेदारी किसकी है, तो कम से कम पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से काम करने दिया जाए।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर चोट
पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना गया है। यदि वे समाज की वास्तविक समस्याओं को उठाते हैं और उनके बदले उन्हें धमकी, बदनामी और प्रशासनिक दबाव झेलना पड़े, तो यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संकेत है।
गौवंश की दुर्दशा पर रिपोर्टिंग करना अपराध नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिम्मेदारी है।
गौमाता की आड़ में राजनीति, ज़मीनी सच्चाई में दुर्दशा
गौमाता की सेवा के नाम पर वोट माँगने वालों से जनता अब जवाब चाहती है। यह प्रश्न केवल गायों की रक्षा का नहीं है, बल्कि नैतिकता, उत्तरदायित्व और लोकतांत्रिक मूल्यों का भी है। यदि बेजुबानों की पीड़ा उठाने वाला पत्रकार ही निशाने पर होगा, तो फिर कौन आवाज़ उठाएगा?
गौवंश की रक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या यह केवल सरपंचों की है? क्या जिला प्रशासन इससे अछूता रह सकता है? क्या राज्य सरकार केवल घोषणाओं और नारों तक सीमित रह सकती है?गायों की सेवा केवल चुनावी नारों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जब तक सड़कों पर तड़पती एक भी गौमाता की तस्वीर दिखती है, तब तक समाज, सरकार और हम सभी को आत्मचिंतन करने की ज़रूरत है।
*रायपुर में किराना व्यापारी उठाई गिरी का शिकार
*रायपुर में किराना व्यापारी उठाई गिरी का शिकार हो गया है। व्यापारी डूमरतराई बाजार में सामान खरीदने गया हुआ था। तभी समान लोडिंग करवाने के दौरान किसी ने गाड़ी से नोटों का बैग पार कर दिया। यह पूरा मामला माना थाना इलाके का हैं।
माना पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, मनोज दीवान ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई। जिसमें बताया कि वह भखारा गांव में रहता है उसकी किराने की दुकान है। 28 जुलाई को सामान खरीदने के लिए डूमरतराई के थोक बाजार गया हुआ था। वह गाड़ी में सामान की लोडिंग करवा रहा था। गाड़ी के कंडक्टर सीट में एक बैग था जिसमें 2 लाख 70 हजार रुपए रखे थे।* गाड़ी लोड होने के बाद जब उसने बैग को देखा तो वह गायब हो गया था। किसी ने गाड़ी की खिड़की से बैग पार कर दिया था। इस मामले में शिकायत मिलने के बाद पुलिस आरोपी की तलाश में जुट गई है।
धान खरीदी केंद्र के लिए नहीं मिली जमीन, मगर चपरासी के रिश्तेदार बना रहे पक्का मकान
वनरक्षक मनबोधन टंडन पर भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी का गंभीर आरोप,वन मंत्री से शिकायत
बलौदाबाजार:-
बलौदाबाजार वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले धाराशिव अस्थाई रोपणी क्षेत्र में वन भूमि पर अतिक्रमण के गंभीर आरोप सामने आए हैं। आश्चर्यजनक रूप से इस अवैध गतिविधि को संरक्षण देने वाले अधिकारी स्वयं उस क्षेत्र के पदस्थ वनरक्षक मनबोधन टंडन बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि मनबोधन टंडन ने वनभूमि पर निजी मकान निर्माण के लिए अपने व्यक्तिगत संबंध वाले व्यक्तियों को संरक्षण दिया और बदले में भारी राशि ली। वन विभाग जैसे संवेदनशील और कानून आधारित तंत्र में यह एक गंभीर अनियमितता और सार्वजनिक धोखा है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, वनरक्षक टंडन ने धाराशिव जंगल में कार्यरत चपरासी संतोष यादव के रिश्तेदारों को वन भूमि पर पक्के मकान निर्माण की अनुमति दी। यह अनुमति न तो किसी कानूनी प्रक्रिया से प्राप्त की गई और न ही विभागीय मंजूरी से जुड़ी है। बल्कि यह कमीशन के बदले संरक्षण का एक क्लासिक उदाहरण माना जा रहा है। ग्रामीणों ने दावा किया कि मनबोधन टंडन ने संबंधित परिवार से लाखों रुपये की घूस ली और उन्हें वन भूमि पर खुलेआम निर्माण कार्य करने दिया। इस दौरान किसी भी प्रकार की कानूनी आपत्ति या विभागीय कार्यवाही नहीं की गई, जो स्वयं में दर्शाता है कि अधिकारी की मंशा साफतौर पर संदेहास्पद है।
धान खरीदी केंद्र के शासकीय कार्य में अड़ंगा, लेकिन निजी निर्माण पर चुप्पी
इस प्रकरण की सबसे विरोधाभासी और गंभीर बात यह है कि इसी वनरक्षक ने धाराशिव क्षेत्र में खुल रहे नए धान खरीदी केंद्र को भूमि देने का विरोध किया था। परिणामस्वरूप, बीते दो वर्षों से किसानों के लिए अत्यंत जरूरी इस केंद्र के निर्माण कार्य – जैसे कार्यालय भवन, चबूतरा, शेड, अहाता आदि – लंबित पड़े हुए हैं। यह केंद्र ग्रामीण किसानों की उपज को सुविधा एवं सरलतापूर्वक बेचने के लिए अत्यंत आवश्यक था, परन्तु वनरक्षक की अनुमति नही मिली।वहीं दूसरी ओर, उसी भूमि पर निजी पक्के मकान बनते देखे जा सकते हैं, जिस पर वनरक्षक की कोई आपत्ति नहीं है।
यह सीधा संकेत करता है कि वनरक्षक सरकारी कार्य में जानबूझकर अड़ंगा डाल रहे हैं, जबकि निजी कार्यों को स्वयं की आर्थिक लाभ के लिए बढ़ावा दे रहे हैं।
ग्रामीणों ने उठाई आवाज, वन मंत्री को की शिकायत
इस पूरे मामले से क्षुब्ध होकर स्थानीय ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ राज्य के वन मंत्री श्री केदार कश्यप को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा। शिकायत में ग्रामीणों ने वनरक्षक मनबोधन टंडन पर निम्नलिखित बिंदुओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं- रिश्वत लेकर वन भूमि पर मकान बनाने की अनुमति देना विभागीय चपरासी के रिश्तेदारों को प्राथमिकता देना,शासकीय कार्यों में अड़ंगा लगाना,पद का दुरुपयोग कर मनमानी और दबावपूर्वक कार्य कराना,वन भूमि की रक्षा करने की जिम्मेदारी को व्यक्तिगत लाभ के लिए दरकिनार करना
जांच समिति पहुंची, आरोप सत्य पाए गए – फिर भी कार्रवाई शून्य
शिकायत मिलने के बाद वन विभाग की ओर से एक उच्च स्तरीय जांच समिति को मौके पर भेजा गया। जांच के दौरान ग्रामीणों के आरोपों की पुष्टि हुई। जांच दल ने पाया कि वन भूमि पर निर्माण कार्य बिना अनुमति जारी है। संबंधित व्यक्तियों से वनरक्षक के संबंध हैं। निर्माण कार्य में प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से वन विभाग की मिलीभगत का संदेह है
फिर भी हैरानी की बात यह है कि जांच के बाद भी कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई है। ना तो निर्माण रोका गया, ना ही वनरक्षक को निलंबित या स्थानांतरित किया गया। इससे पूरे मामले की जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वन संरक्षण अधिनियम की खुली अवहेलना
भारतीय वन संरक्षण अधिनियम, 1980 के अंतर्गत वन भूमि का उपयोग केवल वन उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकता है। किसी भी प्रकार का गैर-वन उपयोग, विशेषकर निजी निर्माण, कानूनन प्रतिबंधित है और इसके लिए राज्य सरकार से विशेष अनुमति आवश्यक होती है।
इस मामले में न तो कोई अनुमति ली गई है और न ही किसी प्रकार की विभागीय प्रक्रिया का पालन किया गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि वन भूमि का निजी स्वार्थ हेतु उपयोग पूरी तरह गैरकानूनी और दंडनीय अपराध है।
वन विभाग की साख और निष्पक्षता दोनों संकट में
धाराशिव वन क्षेत्र का यह प्रकरण वन विभाग की कार्यप्रणाली, उसकी पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही पर गहरा प्रश्नचिन्ह लगाता है। यदि एक वनरक्षक खुलकर पैसे लेकर वन भूमि को निजी निर्माण के लिए उपलब्ध करा रहा है और विभाग उसे बचाने में लगा है, तो यह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि संस्थागत विफलता का संकेत है। शिकायत कर्ताओं एवं ग्रामीणों की मांग कि
आरोपी वनरक्षक मनबोधन टंडन को तत्काल निलंबित किया जाए,अवैध निर्माण को तुरंत रोका जाए और उसे ध्वस्त किया जाए वन भूमि को पुनः सुरक्षित कर विभागीय उपयोग में लाया जाए.जांच समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए,अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की भी भूमिका की जांच हो।
लोगों के द्वारा बयान पर विचार किया गया कार्यवाही के लिये जांच किया जा रहा है और अतिक्रमण कारी को विभाग के द्वारा दो बार नोटिस दिया गए निश्चित रूप उचित कार्रवाई किया जाएगा।
गोविन्द सिँह
एसडीओ वन विभाग एवं जांच अधिकारी
जिला बलौदाबाजार भाटापारा
सूदखोर तोमर ब्रदर्स का अवैध निर्माण ढहाया
रायपुर
सूदखोरी, वसूली, ब्लैकमेलिंग मामले में वांटेड वीरेंद्र सिंह तोमर और रोहित तोमर के घर पर रविवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चला दिया। पुलिस, प्रशासन और निगम की टीम रविवार सुबह 9 बजे बुलडोजर लेकर भाठागांव स्थित तोमर के आलीशान बंगले सांई विला सोसायटी पहुंची।
बुलाने पर तोमर परिवार के यहां से कोई नहीं आया। तब अधिकारी मकान के भीतर गए। उन्हें कार्रवाई का नोटिस थमाया और पीछे हिस्से में बने ऑफिस को तोड़ दिया। यह 1000 वर्गफीट जमीन पर बना था। यहीं से सूदखोरी का अवैध कारोबार चलता था।
यहीं सूदखोरी के दस्तावेज रखे जाते थे। लोगों को धमकाया जाता था। निगम ने इस निर्माण के लिए कई बार तोमर परिवार को नोटिस जारी किया और दस्तावेज मांगा। तोमर परिवार ने जवाब नहीं दिया। उसके बाद रिकॉर्ड खंगाला गया। रिकॉर्ड में अवैध निर्माण पाया गया। निगम ने अवैध निर्माण को तोड़ा है। पुलिस भी अपनी कार्रवाई कर रही है। कोर्ट से अनुमति मिलने के बाद ही तोमर परिवार की संपत्ति को कुर्क किया जाएगा। कोर्ट में प्रक्रिया चल रही है।
तोमर बंधु कई साल से राज्य के प्रमुख नेताओं, विधायक, सांसदों से लेकर मंत्री और मुख्यमंत्रियों तक के साथ फोटो खिंचवाते आए हैं।
इन्हीं फोटो को दिखाकर वह अपना रसूख और दबंगई कायम करने में लगे थे। विष्णुदेव साय सरकार ने तोमर बंधुओं के अवैध निर्माण पर बुलडोजर चलाकर बाकायदा संदेश दिया कि तोमर बंधुओं के राजनीतिक रसूख के दिखावे सही नहीं है। सरकार इस मामले में कोई संरक्षण नहीं देने वाली है।
*छत्तीसगढ़ में 2 नन की गिरफ्तारी...संसद के बाहर प्रदर्शन
रायपुर
*छत्तीसगढ़ के दुर्ग में केरल की 2 कैथोलिक ननों की गिरफ्तारी को लेकर दिल्ली में संसद के बाहर प्रदर्शन हुआ है। मिशनरी सिस्टर्स को धर्मांतरण और मानव तस्करी के आरोप में पकड़ा गया है। गिरफ्तारी के विरोध में सोमवार को केरल से विपक्ष के सांसदों ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट 'एक्स' पर लिखा- छत्तीसगढ़ में 2 कैथोलिक ननों को उनकी आस्था के कारण निशाना बनाकर जेल भेज दिया गया। यह न्याय नहीं, बल्कि भाजपा-RSS का भीड़तंत्र है। वहीं इस मामले में दुर्ग रेलवे स्टेशन से बरामद की गई युवती की मां ने बताया कि- 'हमने अपनी बेटी को खुद भेजा था, अपने पैर पर खड़ा होने के लिए।' जबकि युवती के जीजा ने बताया था कि मैंने कहा था किसी पर विश्वास करके ऐसे नहीं भेजना, लेकिन मेरी बात किसी ने नहीं मानी केसी वेणुगोपाल ने कहा- 'ननों ने पुलिस को बताया कि हम उन्हें कानूनी तौर पर ले जा रहे हैं और हमारे पास उनके माता-पिता की अनुमति है, लेकिन पुलिस ने उनकी एक नहीं सुनी।
भाजपा शासित राज्यों में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं'। उन्होंने कहा कि 'वे नियमों के तहत 3 युवतियों को नौकरी के लिए ले जा रही थीं, लेकिन वहां की (छत्तीसगढ़) सरकार और बजरंग दल ने आरोप लगाया कि यह तस्करी का मामला है और वे युवतियों को धर्मांतरण के लिए ले जा रही थीं। यह पूरी तरह से झूठ था।' छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा सीधे अल्पसंख्यकों को टारगेट कर रही है। इस मामले को लेकर हमारे संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने केंद्रीय गृहमंत्री और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखा है। सुनील सोनी ने आगे कहा कि छत्तीसगढ़ के अंदर में कोई भी व्यक्ति सामाजिक संरचना को बिगाड़ेगा, धार्मिक आस्था पर ठेस पहुंचाएगा या धर्मांतरण कराएगा, वह जेल में जाएगा। आप कितना भी प्रदर्शन करें या ट्वीट करें। विष्णुदेव सरकार में आने वाले समय में धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून बनेगा।
बेलतरा से भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला ने कहा कि पिछली भूपेश बघेल की सरकार ने चर्चों को वोट बैंक की राजनीति का माध्यम बनाकर सरंक्षण दिया। वोट बैंक की राजनीति में पूरी कांग्रेस पार्टी मतांतरित हो चुकी है। जानकारी के मुताबिक नारायणपुर की युवतियों को आगरा ले जाने वालों का नाम सुखमन मंडावी और मिशनरी सिस्टर प्रीति और वंदना है। ये तीनों लोग कमलेश्वरी, ललिता और सुखमति नाम की युवती को आगरा लेकर जा रहे थे, जिन्हें बजरंग दल ने पकड़ा है।
बताया जा रहा है कि पकड़े गए मिशनरी सिस्टर और युवक के पास पादरी का नंबर और 7 नाबालिग लड़कियों की तस्वीरें मिली हैं। साथ ही कुछ दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। तीनों लड़कियों को भिलाई सखी सेंटर में रखा गया है, जबकि 2 मिशनरी सिस्टर और युवक GRP की हिरासत में हैं।
केंद्रीय राज्यमंत्री ने की समीक्षा:नक्सल क्षेत्रों में BSNL के 400 नए टॉवर लगेंगे ..रायपुर
केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित और दूरस्थ इलाकों में बीएसएनएल के 400 नए टॉवर लगाने जा रही है। केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने प्रदेश के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद यह जानकारी दी। डॉ. शेखर ने कहा कि सुरक्षा बल और वन विभाग की मंजूरी के बाद टावरों की स्थापना की प्रक्रिया शुरू होगी।
डॉ. शेखर ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को मिशन मोड में लागू किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में सेवाएं घर-घर तक पहुंचाने की रणनीति अपनाई गई है। यहां के स्कूलों का डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इससे छात्रों को अब जेईई, नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिल रही है।
इसमें बीएसएनएल की भूमिका महत्वपूर्ण है। इसकी उच्च गुणवत्ता की 4-जी सेवाओं के जरिए देश के अंतिम गांव तक डिजिटल कनेक्टिविटी का मिशन साकार हुआ है। बैठक में ग्रामीण विकास विभाग, डाक विभाग, दूरसंचार विभाग और भारत संचार निगम लिमिटेड के अधिकारी शामिल हुए।
जनपद सदस्य जामवती नीलकमल साहू को शिक्षक साथियों के द्वारा भेंट किए गए स्मृति चिन्ह
गोविंद राम जिला ब्यूरो
बलौदा बाजार:-
बलौदा बाजार जिला अंतर्गत विकासखंड पलारी के ग्राम पंचायत दतान क्षेत्र से जनपद पंचायत सदस्य श्रीमती जामवंती नीलकमल साहू सभापति स्वच्छता विभाग को शिक्षक साथियों के द्वारा दतान के शा प्राथ शाला व शा पूर्व माध्य शाला दतान प स्कूल का शिक्षिकाओं के द्वारा सिद्धेश्वर नाथ का स्मृति चिन्ह भेंट कर बधाई दिए कि अपने क्षेत्र में लगातार साफ सफाई व स्वच्छता की ओर ध्यान देते हुए अच्छे कार्य के लिए,,प्रभु भोलेनाथ के सिद्धेश्वर नगरी पलारी जो की बालसमंद में स्थित है
उसकी स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए श्रावण मास की शुभकामनाएं दिया गया, जिसमें मुख्य रूप से प्रधान पाठक श्रीमती देवकी धुव्र, प्रधान पाठक श्रीमती किरण ठाकुर, ,श्रीमती संध्या पैकरा, श्रीमती सरस्वती वर्मा,श्री कमलेश कुमार साहू, श्री अभिषेक महोबे,श्री श्रवण कुमार साहू,श्री प्रकाश कुमार सेन,श्री शिव कुमार वर्मा, श्री देवेश कुमार साहू,प्यारेलाल ध्रुव, शिक्षाक व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज राज एवं केंद्रीय युवा कार्यकारिणी द्वारा वृक्षारोपण अभियान
गोविंद राम जिला ब्यूरो
देवसुंद्रा :-
छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज केंद्रीय युवा कार्यकारिणी एवं राज कार्यकारिणी पदाधिकारियों सदस्यों द्वारा वृहत स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जा रहा है जिसके अंतर्गत मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज के दस राज में पर्यावरण सुदृढ़ बनाने चारों ओर हरियाली लाने छत्तीसगढ़ महतारी के श्रृंगार करने बढ़ते तापमान खंड वर्षा वायु प्रदूषण जल प्रदूषण एवं कारखानों से निकलता जहरीला धुवां से बचने भरपूर मात्रा में क्षितिज पर ऑक्सीजन प्रसारित करने अनवरत चल रहे पौधारोपण को नया दशा एवं दिशा देते हुए प्रथम चरण में पाटनराज के ग्राम अमलेश्वर दूसरे क्रम में दुर्गराज के कुम्हारी स्थित नगरपालिका परिसर में सामूहिक रूप से पौधा लगाया गया यह वृक्षारोपण अभियान संकल्प है प्रकृति की रक्षा का आनेवाली पीढ़ी की सुरक्षा का है लुप्त हो रहे क्षेत्रीय पेड़ो को फिर से नवजीवन देने का है मां भारती की सेवा प्रकृति की बचाव मिट्टी की कटाव को रोकना सही दिशा में मार्ग प्रशस्त है इसके पहल कुर्मी समाज के द्वारा कर दी गई है
जिससे प्रेरणा लेकर अन्य समाज भी इस दिशा में आगे बढ़ेंगे वृक्षारोपण कार्य जन्मदिवस वैवाहिक कार्यक्रम छुट्टी अवसर दशगात्र कार्यक्रम तीज त्यौहार राष्ट्रीय पर्व महापुरुषों के जयंती एवं पुण्यतिथि पर किया जाय जिससे पर्यावरण के क्षेत्र के साथ- साथ आज के युवा पीढ़ी इतिहास में राज्य के प्रति देश के प्रति अनेकों क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल कर बिसरते जा रहे है उनसे अवगत हो सके उनकी मान सम्मान कर सके राज एवं केंद्रीय युवा कार्यकारिणी द्वारा दुर्ग नगर इकाई में आयोजन डॉ खूबचंद बघेल जयंती में सम्मिलित हुए उक्त अवसर पर मीना वर्मा अध्यक्ष नगरपालिका कुम्हारी,युगल किशोर आडील राजप्रधान पाटन राज,केंद्रीय युवाध्यक्ष चंद्रकांत वर्मा ,केंद्रीय युवा उपाध्यक्ष लोकेश वर्मा ,केंद्रीय पर्यावरण प्रकोष्ठ इंद्रकुमार वर्मा ,लक्ष्मण कुमार वर्मा ,विकास मढ़रिया युवाध्यक्ष दुर्ग राज ,राकेश आडील युवाध्यक्ष पाटन राज, ललित बिजोरा पूर्व केंद्रीय युवा अध्यक्ष एवं बड़ी संख्या में स्वजातीयगण शामिल रहे।
त्योहार की भीड़, डाकघर की ढीली चाल – बलौदाबाजार में उमड़ती परेशानी जहाँ समय पर डाक न पहुंचे, वहाँ न्याय और नौकरी कैसे पहुंचे?
गोविंदराम जिला ब्यूरो
बलौदाबाजार
:-रक्षाबंधन पर्व नजदीक आते ही जहां देशभर में रेल, परिवहन और व्यापारिक व्यवस्थाएं तेज़ कर दी जाती हैं, वहीं बलौदाबाजार जिले के एकमात्र मुख्य डाकघर की धीमी कार्यप्रणाली लोगों की परेशानी का कारण बनती जा रही है। ज़िला मुख्यालय स्थित डाकघर में प्रतिदिन सैकड़ों लोग पत्र, दस्तावेज़ और आवश्यक पार्सल भेजने के लिए कतार में खड़े नजर आते हैं, परंतु मात्र एक काउंटर होने और समयसीमा दोपहर 3 बजे तक निर्धारित होने के कारण अधिकांश लोगों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है। रक्षाबंधन जैसे भावनात्मक पर्व के अवसर पर जहां बहनें भाई के लिए राखी भेजने आती हैं, वहीं दूसरी ओर जॉब संबंधित आवेदन, न्यायालयीन दस्तावेज़, विभागीय पत्राचार और अन्य निजी-शासकीय कार्य भी इसी डाकघर पर निर्भर हैं। रोजाना सुबह से लोग कतार में खड़े रहते हैं, परंतु अत्यंत धीमी प्रक्रिया और मात्र एक ही काउंटर के चलते अधिकांश लोगों का कार्य समय रहते नहीं हो पाता।
बताया जा रहा है कि कई मामलों में न्यायालय संबंधित दस्तावेज़, जैसे कि ज़मानत आदेश या अन्य विधिक नोटिस, समय पर संबंधित पक्षों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। यह न केवल व्यक्तिगत बल्कि संवैधानिक अधिकारों के हनन की स्थिति उत्पन्न कर रहा है। यह विडंबना है कि ज़िले का एकमात्र प्रमुख डाकघर, जहाँ से जिला न्यायालय, कलेक्टर कार्यालय, और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों का पत्र व्यवहार संचालित होता है, वह भी वर्षों से अतिरिक्त काउंटर या विशेष व्यवस्था से वंचित है। वर्षों पूर्व जिला न्यायालय परिसर एवं कलेक्टर कार्यालय के समीप पृथक डाकघर खोलने की योजना सामने आई थी, परंतु आज तक वह धरातल पर नहीं उतर सकी। जब देश में किसी पर्व विशेष के समय विशेष ट्रेनें चलाई जाती हैं,
अतिरिक्त बसें लगाई जाती हैं, तो डाक विभाग क्यों अब भी पुराने ढर्रे पर कार्य कर रहा है? यह सवाल आज आम नागरिकों के मन में है। क्या त्योहारों को देखते हुए एक और काउंटर की सुविधा नहीं बढ़ाया जा सकता? बलौदाबाजार वासियों की यह स्पष्ट मांग है कि रक्षाबंधन और आगामी अन्य त्योहारों को देखते हुए डाकघर में अस्थायी अतिरिक्त काउंटर खोले जाएं, समयसीमा बढ़ाई जाए, और डिजिटल सेवाओं को भी सुलभ बनाया जाए। साथ ही जिला न्यायालय व कलेक्टर कार्यालय के लिए अलग डाकघर शीघ्र स्थापित किया जाए, जिससे न केवल आमजन को राहत मिले, बल्कि प्रशासनिक कार्य भी समय पर संपन्न हो सकें।
जनपद सदस्य जामवती नीलकमल साहू को शिक्षक साथियों के द्वारा भेंट किए गए स्मृति चिन्ह
बलौदा बाजार:-
बलौदा बाजार जिला अंतर्गत विकासखंड पलारी के ग्राम पंचायत दतान क्षेत्र से जनपद पंचायत सदस्य श्रीमती जामवंती नीलकमल साहू सभापति स्वच्छता विभाग को शिक्षक साथियों के द्वारा संकुल केंद्र दतान के सभी शिक्षक व शिक्षिकाओं के द्वारा सिद्धेश्वर नाथ का स्मृति चिन्ह भेंट कर बधाई दिए कि अपने क्षेत्र में लगातार साफ सफाई व स्वच्छता की ओर ध्यान देते हुए अच्छे कार्य के लिए,,प्रभु भोलेनाथ के सिद्धेश्वर नगरी पलारी जो की बालसमंद में स्थित है उसकी स्मृति चिन्ह भेंट करते हुए श्रावण मास की शुभकामनाएं दिया गया,
जिसमें मुख्य रूप से प्रधान पाठक श्रीमती देवकी धुव्र, प्रधान पाठक श्रीमती किरण ठाकुर, ,श्रीमती संध्या पैकरा, श्रीमती सरस्वती वर्मा,श्री कमलेश कुमार साहू, श्री अभिषेक महोबे,श्री श्रवण कुमार साहू,श्री प्रकाश कुमार सेन,श्री शिव कुमार वर्मा, श्री देवेश कुमार साहू,प्यारेलाल ध्रुव, शिक्षाक व जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कलम आज उनकी जय बोल
अरविन्द तिवारी की रिपोर्ट
रायपुर –
आज कारगिल का छब्बीसवां विजय दिवस वर्षगांठ स्वतंत्र भारत के लिये एक महत्वपूर्ण दिवस है। यह दिन है उन शहीदों को याद कर अपने श्रद्धा-सुमन अर्पण करने का है , जो हँसते-हँसते मातृभूमि की रक्षा करते हुये वीरगति को प्राप्त हुये। यह दिन समर्पित है उन्हें , जिन्होंने अपना आज हमारे कल के लिये बलिदान कर दिया। इन शहीदों ने भारतीय सेना की शौर्य व बलिदान की उस सर्वोच्च परम्परा का निर्वाह किया , जिसकी सौगन्ध हर सिपाही तिरंगे के समक्ष लेता है। इन रणबाँकुरों ने भी अपने परिजनों से वापस लौटकर आने का वादा किया था , जो उन्होंने निभाया भी , मगर उनके आने का अन्दाज निराला था। वे लौटे , मगर लकड़ी के ताबूत में। उसी तिरंगे मे लिपटे हुये , जिसकी रक्षा की सौगन्ध उन्होंने उठायी थी। जिस राष्ट्रध्वज के आगे कभी उनका माथा सम्मान से झुका होता था , वही तिरंगा मातृभूमि के इन बलिदानी जाँबाजों से लिपटकर उनकी गौरव गाथा का बखान कर रहा था। यह कारगिल युद्ध में भारतीय सेना की जीत के उपलक्ष्य में एवं शहीद हुये जवानों के सम्मान में प्रतिवर्ष 26 जुलाई को मनाया जाता है। बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सैनिकों व पाक समर्थित आतंकवादियों का लाइन ऑफ कंट्रोल यानि भारत-पाकिस्तान की वास्तविक नियंत्रण रेखा के भीतर प्रवेश कर कई महत्वपूर्ण पहाड़ी चोटियों पर कब्जा कर लेह-लद्दाख को भारत से जोड़ने वाली सड़क का नियंत्रण हासिल कर सियाचिन-ग्लेशियर पर भारत की स्थिति को कमजोर कर हमारी राष्ट्रीय अस्मिता के लिये खतरा पैदा कर रहे थे जिसके चलते यह युद्ध हुआ। लगभग अठारह हजार फीट ऊँचाई में बर्फीली चट्टानों के बीच पूरे दो महीने से ज्यादा चले इस युद्ध में भारतीय थलसेना व वायुसेना ने लाइन ऑफ कंट्रोल पार ना करने के आदेश के बावजूद अपनी मातृभूमि में घुसे आक्रमणकारियों को मार भगाया था। स्वतंत्रता का अपना ही मूल्य होता है, जो वीरों के रक्त से चुकाया जाता है। वर्ष 1999 में मई से जुलाई तक चलने वाला यह युद्ध जम्मू कश्मीर के कारगिल सेक्टर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर हुआ था। पाकिस्तानी घुसपैठियों ने कारगिल की पहाड़ियों पर अपना कब्जा जमा लिया था। इस युद्ध में 527 से भी ज्यादा भारतीय सैनिक पाकिस्तान के साथ लड़ाई में शहीद हुये थे वहीं लगभग 1300 से ज्यादा जवान घायल भी हुये थे। अन्त में 26 जुलाई 1999 के दिन भारतीय सेना ने कारगिल युद्ध के दौरान चलाये गये ‘ऑपरेशन विजय’ को सफलतापूर्वक अंजाम देकर भारत भूमि को घुसपैठियों के चंगुल से मुक्त कराया था। भारतीय सैनिकों ने यह जंग जीत कर कारगिल की चोटियों पर फिर से तिरंगा फहराया था। सभी कारगिल शहीदों ने जान की बाजी लगाकर ना केवल दुश्मनों को धुल चटाई थी , बल्कि रणक्षेत्र में उन्हें मार गिराने में भी कामयाब हुये थे। इनकी स्मृति में हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। आज भी हम कारगिल विजय दिवस पर शहीदों को याद कर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें नमन करना नही भूलते। इन शहीदों के घर-आंगन में आज भी मायूसी है। परिजनों को वीर सपूतों के शहादत पर गर्व है , लेकिन उनको खोने का मलाल भी है। मातृभूमि पर सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अमर बलिदानी भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं , मगर इनकी यादें हमारे दिलों में हमेशा- हमेशा के लिये बसी रहेंगी। कारगिल विजय दिवस पर हमारे आज के लिये शहीद होने वाले सभी अमर जवानों को पत्रकारिता जगत के अरविन्द तिवारी की तरफ से अश्रुपूरित श्रद्धांजलि एवं शत शत नमन।
कलम आज उनकी जय बोल।
चढ़ गये जो पुण्यवेदी पर , लिये बिना गर्दन का मोल ।
कलम आज उनकी जय बोल ।।